100 Short Story In Hindi With Moral : हिंदी की नैतिक कहानियां

आज हम “100 short story in hindi with moral”हिंदी कहानियाँ पढ़ने वाले है जो हमारे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है

हम बचपन से अपने माता-पिता, नाना-नानी और दादा-दादी से कई कहानियां सुनते आए हैं। हमारे देश में कहानी सुनना और सुनाना बहुत पुराना है। आपने देखा होगा कि ज्यादातर गाँवों में मनोरंजन के साधन नहीं हैं।

वहां लोग कहानी और कविता सुनकर खुश होते हैं। यह कहानियां जितनी मनोरंजक हैं उतनी ही शिक्षाप्रद और रोचक भी हैं।

आपको बता दें कि हिंदी साहित्य में बहुत से लेखक ऐसी छोटी-छोटी कहानियां लिखी हैं जो विद्यार्थियों को अच्छी तरह से काम करती हैं। अकबर-बीरबल, पंचतंत्र और तेनालीरामा इन छोटी कहानियों में हैं।

Short Story In Hindi With Moral

आज हम 100 से भी अधिक हिंदी कहानियाँ पढ़ने वाले है जिनको पढ़ कर मनोरंजन भी होगा और ज्ञान भी प्राप्त होगा। तो चलिए 100 Short Story In Hindi को पढ़ना सुरु करते है।

हाथी और बकरी की कहानी | Elephant And Goat Story In Hindi

एक जंगल में एक हाथी और एक बकरी रहते थे। दोनों बहुत पक्के दोस्त थे। दोनों साथ में मिलकर हर दिन खाने की तलाश करते और साथ में ही खाते थे। एक दिन दोनों खाने की तलाश में अपने जंगल से बहुत दूर निकल गए। वहां उन्हें एक तालाब दिखाई दिया। उसी तालाब के किनारे एक बेर का पेड़ था।

Short Story In Hindi With Moral

बेर का पेड़ देखकर हाथी और बकरी बहुत खुश हुए। वह दोनों बेर के पेड़ के पास गए, फिर हाथी ने अपनी सूंड से बेर के पेड़ को ज़ोर से हिलाया और ज़मीन पर ढेर सारे पके हुए बेर गिरने लगे। बकरी जल्दी-जल्दी गिरे हुए बेरों को इक्ठ्ठा करने लगी।

संयोगवश उसी बेर के पेड़ पर एक चिड़िया का घोंसला भी था, जिसमें चिड़िया का एक बच्चा सो रहा था और चिड़िया दाने की खोज में कहीं गई हुई थी। बेर का पेड़ ज़ोर से हिलाने के कारण चिड़िया का बच्चा घोंसले से बाहर तालाब में गिर पड़ा और डूबने लगा।

चिड़िया के बच्चे को डूबता हुआ देखकर, उसे बचाने के लिए बकरी तालाब में कूद गई, लेकिन बकरी को तैरना नहीं आता था। इस वजह से वह भी तालाब में डूबने लगी।

बकरी को डूबता हुआ देखकर हाथी भी तालाब में कूद गया और उसने चिड़िया के बच्चे और बकरी, दोनों को डूबने से बचा लिया।

इतने में चिड़िया भी वहां पर आ गई थी और वह अपने बच्चे को सही-सलामत देखकर बहुत खुश हुई। उसने हाथी और बकरी को इसी तालाब और बेर के पेड़ के पास रहने के लिए कहा। तब से हाथी और बकरी भी चिड़िया के साथ उस बेर के पेड़ के नीचे रहने लगे।

कुछ ही दिनों में चिड़िया का बच्चा बड़ा हो गया। चिड़िया अपने बच्चे के साथ जंगल में घूम कर आती थी और हाथी और बकरी को जंगल में किस पेड़ पर फल लगे हैं, इसकी जानकारी देती थी। इस तरह हाथी, बकरी, और चिड़िया मज़े में रहते और खाते-पीते थे।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): हमें किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। अगर हमारी गलती से किसी को परेशानी होती है, तो उस गलती को सुधारना चाहिए और मन-मुटाव दूर करते हुए एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।

लालची लोमड़ी की कहानी (Lalchi lomdi ki kahani):

एक बार एक चतुर लोमड़ी जंगल में रहती थी। वह गर्मी के दिनों में जंगल में भूखी भटकती थी। लोमड़ी बहुत देर जंगल में भटकने के बाद एक खरगोश पाया। खरगोश इतना छोटा था कि लोमड़ी उसे खाने की बजाय छोड़ दिया।

Lalchi lomdi ki kahani

तब लोमड़ी फिर से जंगल में भटकने लगी। जंगल में कुछ देर भटकने के बाद, भूखी लोमड़ी को एक हिरण दिखाई दिया, जिसे देखते ही लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। लोमड़ी हिरण को पकड़ने के लिए दौड़ने लगी। लोमड़ी ने पूरी ताकत से हिरण को पीछा किया, लेकिन हिरण नहीं पकड़ पाया।

लोमड़ी अब खाने की तलाश में थक चुकी थी। जब हिरन भी उसके हाथ में नहीं था, लोमड़ी ने सोचा कि छोटे से खरगोश को खाना ही बेहतर होगा। लोमड़ी कुछ देर विश्राम करने के बाद जंगल में खरगोश की तलाश में फिर से भटकने लगी।

जंगल में खरगोश खोजते हुए लोमड़ी वहाँ पहुँची जहाँ उसने खरगोश को देखा। लेकिन लोमड़ी को वहां कोई खरगोश नहीं दिखाई दिया। लोमड़ी को थक हारकर अपनी गुफा में लौटना पड़ा। तब लोमड़ी को अपनी गुफा में कई दिनों तक भूखा रहना पड़ा. फिर बहुत दिनों बाद उसे खाना मिला।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): उपरोक्त लोमड़ी की कहानी हमें लालच नहीं करना चाहिए। यदि आप संतोषी जीवन जीते हैं, तो आप खुश रहते हैं। हिंदी में “लालच बुरी बला है” भी एक प्रसिद्ध मुहावरा है।

किस्मत की चाबी

एक छोटे से गांव में रामु नामक लड़के रहता था। उसके पास एक पुरानी चाबी थी, जो उसके दादी जी से मिली थी। चाबी का कोई स्पेशल आयोजन था नहीं, लेकिन रामु ने उसे अपनी यादगार चीज़ों की एक झलक मान लिया था।

एक दिन, रामु ने गांव में एक स्वर्ण दिन आयोजित किया। वह चाबी के साथ-साथ बड़े बड़े सवालों के आइसीआर भी तैयार किए थे। लोगों ने देखा कि रामु ने चाबी को एक बड़े पत्थर के निचे छिपा दिया था।

सवालों की यह लाइन चलने लगी कि चाबी कैसे निकालने हैं। कुछ लोग पत्थर को तोड़ने की कोशिश करने लगे, कुछ लोग उसे खुदाई से निकालने की कोशिश कर रहे थे। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, सभी ने अपने-अपने तरीकों से प्रयास किए। परंतु पत्थर केवल और केवल हड्डियों की तरह अटका रहा।

दो दिन बित गए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। लोग थक गए, रामु भी परेशान हो गया, लेकिन वह हार नहीं मानता था। उसकी मेहनत और संघर्ष ने सबको प्रेरित किया। एक बच्चे ने एक नयी दिशा की दिशा में सोचने की सलाह दी।

उसने कहा, “क्यों नहीं हम सब मिलकर इस पत्थर को उठा देते? हम साथ मिलकर मजबूत होंगे और हमारा लक्ष्य पूरा हो सकेगा।”

लोगों ने उस बच्चे की बातों को मान लिया और वे सभी मिलकर पत्थर को उठाने लगे। कुछ समय में ही पत्थर उठ गया और चाबी मिल गई। सबने रामु को गले लगाया और उसकी मेहनत की सराहना की।

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि संघर्ष में हार नहीं माननी चाहिए। हमें सामर्थ्य होने पर आत्मविश्वास रखना चाहिए और समस्याओं का समाधान निकालने के लिए नए और सोचने की क्षमता होनी चाहिए।

मोरल: संघर्ष में हार नहीं माननी चाहिए और नए और सोचने की क्षमता होनी चाहिए।

बिल्ली और चूहों की कहानी| Chuha Billi Ki Kahani

चूहे एक बार बिल्ली को देखकर डर गए और अब बिल्ली को नहीं पकड़ते। बिल्ली एक बार भूखी हो गई। उसकी आहट सुनते ही सभी चूहे अपने बिल में छुप गए।

भूख से बचने के लिए बिल्ली ने उपाय करने लगे। वह एक टेबल पर लेट गई जब उसके मन में कुछ आया। उसने सभी चूहों को मर चुकी है सोचने पर मजबूर कर दिया।

Chuha Billi Ki Kahani

बिल्ली को ऐसे लेटा हुआ अपने बिल से ही सभी चूहे देख रहे थे। उन्हें पता था कि बिल्ली बहुत चालाक है, इसलिए कोई भी चूहा अपने बिल से बाहर नहीं निकला।

लेकिन बिल्ली भी हार नहीं मानती थी। वह उसी टेबल पर उल्टी लेटी रही। धीरे-धीरे चूहों को बिल्ली मर गई लगी। वह खुशी से अपने बिल से बाहर निकलने लगे।

चूहे बिल्ली की टेबल के पास आते ही उछलकर दोनों को पकड़ लिया। बिल्ली ने इस बार भी खाना खाया, लेकिन चूहे अब और भी सावधान हो गए।

दो चूहे खाने के बाद बिल्ली भूख से तड़पने लगी। बिल्ली को इस बार फिर से खाना खाना चाहिए था। इस बार छोटी योजना काम नहीं आई। बिल्ली अब पूरे आटे से ढक गई।

चूहों ने उसे आटा समझा और खाने लगे। लेकिन एक पुराने चूहे ने उन्हें रोका। जब उसने ध्यान से आटा देखा, उसे बिल्ली का आकार दिखाई दिया।

तब पुराने चूहे ने चिल्लाना शुरू किया। “सब अपने बिल में चले जाओ,” उसने कहा। यहाँ बिल्ली आटे में छुपी है।बूढ़े चूहे ने कहा, तो सभी चूहे अपने बिल में चले गए।

बिल्ली थक गई जब कोई चूहा बहुत देर तक उसके पास नहीं आया। बूढ़े चूहे ने अपने अनुभव से सभी चूहों को बचाया।

कहानी से कुछ सीखें (Short Story In Hindi): बिल्ली और चूहे की कहानी बताती है कि धोखा कैसे किया जा सकता है।

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प्यासे कौवे की कहानी:(pyasa kauwa story in hindi)

एक बार बहुत तेज गर्मी पड़ रही थी। दोपहर हो चुकी थी। इस गर्म दोपहर में एक कौवा प्यास के पानी की तलाश में भटक रहा था। कौवे को बहुत जगह ढूंढने के बाद भी पानी नहीं मिला। पानी की तलाश में कौवा सिर्फ उड़ता रहा।

pyasa kauwa story in hindi

पानी की तलाश में उड़ते हुए प्यासे कौवे ने पानी से भरे घड़े पर देखा। पानी पीने के लिए प्यासे कौवा घड़े के पास आया. उसने अपना मुँह घड़े में डालकर देखा कि पानी उसकी पहुँच से बाहर है। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन कौवा अपनी चोंच पानी तक नहीं पहुंचा पाया।

जब वह पानी तक अपनी चोंच नहीं पहुंचा पा रहा था, तो कौवे ने एक रास्ता निकाला। कौवे ने अपनी चोंच में पत्थर और कंकड़ लाकर घड़े में डालने लगा। एक या दो कंकड़ कौवा को अपनी चोंच से लाकर घड़े में डाल देता। पत्थर और कंकड़ डालने से घड़े का पानी ऊपर आने लगा। जब तक घड़े का पानी ऊपरी सिरे तक नहीं पहुंच गया, प्यासा कौवा घड़े में पत्थर डालता रहा।

पानी घड़े के ऊपरी सिरे तक पहुंच गया, कौवे की मेहनत रंग लाई और जल्दी से पी गया।

कौवे की कहानी से सीख: ऊपर बताई गई कहानी हमें सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में सकारात्मक होना चाहिए। यदि आप किसी काम को शुरू करने से पहले हार मान लेंगे तो आप निश्चित रूप से हार जाएंगे। आपको बस अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से मेहनत करते रहना चाहिए, और आपको सफलता निश्चित रूप से मिलेगी।

सुनहरी कुल्हाड़ी की कहानी (The Woodcutter And The Golden Axe Story In Hindi)

एक नगर में किशन नाम का एक लकड़हारा था। अपने गुजर बसर के लिए वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता था और उसे नगर में बेचता था। लकड़हारा इन लकड़ियों को बेचकर अपने लिए खाना खरीदकर खाता था। इसे हर दिन करता था।

एक दिन, जंगल में एक लकड़हारा एक तेज बहती हुई नदी के पास एक पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काट रहा था। लकड़हारे ने पेड़ से लकड़ी काटते हुए कुल्हाड़ी छोड़ दी, जो नदी में जा गिरी।

Woodcutter And The Golden Axe Story In Hindi

लकड़हारा पेड़ से नीचे उतरा और कुल्हाड़ी खोजने लगा. बहुत प्रयास करने के बाद भी उसे कुल्हाड़ी नहीं मिली। लकड़हारे ने सोचा कि नदी का बहाव तेज है और पानी बहुत गहरा है। कुल्हाड़ी पानी के साथ नदी में बह गई होगी।

लकड़हारा नदी किनारे बैठकर उदास होकर रोने लगा। लकड़हारा कुल्हाड़ी खो जाने से बहुत दुखी था। लकड़हारे ने सोचा कि उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह एक नई कुल्हाड़ी खरीद सके।

लकड़हारा दुखी होकर नदी किनारे बैठा था, तब एक देवता की तरह एक आदमी नदी से आया और उसे आवाज़ दी। देवता ने लकड़हारे से पूछा कि वह रो क्यों रहा है और इतनी दुखी क्यों है। देवता से पूछने पर अपनी कुल्हाड़ी खोने की पूरी कहानी बताई। लकड़हारे की बात सुनकर देवता ने कहा कि वह कुल्हाड़ी ढूंढकर लकड़हारे को मदद करेगा।

देवता फिर नदी में गिर गए और कुछ देर बाद बाहर निकले। लकड़हारे ने देखा कि देवता के हाथ में तीन अलग-अलग प्रकार की कुल्हाड़ियाँ थीं। देवता ने सोने की पहली कुल्हाड़ी दिखाकर लकड़हारे से पूछा कि क्या वह तुम्हारी है? लकड़हारे ने भगवान से कहा कि वह सोने की कुल्हाड़ी नहीं है. फिर देवता ने चांदी की कुल्हाड़ी दिखाकर पूछा कि क्या वह तुम्हारी है?

लकड़हारे ने कहा कि नहीं, भगवान, यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है। तब देवता ने लकड़ी की कुल्हाड़ी दिखाकर फिर वही प्रश्न पूछा। अब लकड़हारे ने कहा कि यह लकड़ी की कुल्हाड़ी मेरी है, जिससे मैं पेड़ पर बैठकर लकड़ी काट रहा हूँ। लकड़ी काटते समय मेरा हाथ छूट गया और नदी में गिर गया।

देवता लकड़हारे की ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुए। देवता ने कहा कि किशन, यदि तुम्हारी जगह कोई और होता तो वह खुशी से सोने या चांदी की कुल्हाड़ी लेता, लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया। तुम्हारी ईमानदारी से हम बहुत अधिक खुश हैं।

मैं तुम्हें पवित्र और सच्चे मन से मेरे द्वारा पूछे गए सभी सवालों के जवाब के रूप में तीनों कुल्हाड़ी देता हूँ। यह तीनों कुल्हाड़ी भेंट के रूप में अपने पास रखें। लकड़हारा को तीनों कुल्हाड़ी मिलने से बहुत खुशी हुई। वह तीनों कुल्हाड़ी लेकर घर गया।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): उपरोक्त लकड़हारे की कहानी हमें सिखाती है कि हमें जीवन में कभी भी ईमानदारी से दूर नहीं रहना चाहिए।

दो भाई ( Hindi कहानियाँ)

एक बार एक गाँव में दो भाई थे: बड़ा अली और छोटा अकरम। दोनों भाई एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थे। हलवे पराठे की ठेली बड़ा भाई अली लगाता था। ऐसा ही दूसरा छोटा भाई अकरम था, जो बहुत आलसी था और कुछ भी नहीं करता था। अकरम सिर्फ जल्दी अमीर बनने की कल्पना करता था।

छोटा भाई अकरम एक बार अपनी भाभी के लिए सूट लेकर आया। अकरम ने भाभी को सूट दिया, जो उसे बहुत पसंद आया। सूट दख अकरम की भाभी ने कहा, अकरम, तुम कुछ भी नहीं कमाते तो इतने पैसे कहाँ से आए? “भाभी जान आप यह सब मत पूछो, मैं सिर्फ जुगाड़ करता हूँ, और इन जुगाड़ों से मैं बहुत जल्दी अमीर बन जाऊंगा,” अकरम ने कहा।

अकरम का बड़ा भाई अली ने कहा कि इन जुगाड़ों से भले ही तुम अमीर बन जाओ, लेकिन ऐसे पैसों से कमाई गई अमीरता बहुत देर नहीं रहेगी। तब अकरम ने कहा कि भाईजान, तुम्हें रहने दो, तुम ईमानदारी से काम करते हो लेकिन ईमानदारी से सिर्फ जरूरतें पूरी कर सकते हो, अमीर बनने का सपना नहीं. अकरम ने इसके बाद हमेशा अपने बड़े भाई का मुंह बंद कर दिया।

बाजार के बीच में अली ने हलवा पराठे की ठेली लगाई। Ali’s हलवा अच्छी क्वालिटी का होता था, इसलिए ग्राहकों की भीड़ लगातार रहती थी। अली का बनाया हलवा लोगों को इतना पसंद आता था कि वे इसे पैक करके घर ले जाते थे। लेकिन अली को इससे अपने मुनाफे में काफी नुकसान उठाना पड़ा।

एक बार जब अली ने अपनी पत्नी फातिमा को अपने पूरे महीने का हिसाब दिया तो Ali की पत्नी फातिमा ने बताया कि इस बार का मुनाफा पिछले महीने से कम है। अली की पत्नी फातिमा ने इस पर कहा कि ऐसे तो हमारा जीवन नहीं चलेगा। तब अली ने कहा कि इस महीने तेल की कीमतें बढ़ गईं, इसलिए लाभ थोड़ा कम हुआ है। यह सुनकर फातिमा ने कहा कि आप भी अपने हलवे और पराठे की कीमतें बढ़ा दीजिए, इससे बहुत पैसा मिलेगा।

अली ने कहा कि नहीं फातिमा, मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि अगर मैं ऐसा करूँगा तो मेरा बना हुआ हलवा बहुत कम लोग खरीदेंगे। जैसा आप ठीक समझें, फातिमा ने फिर कहा। अकरम, अली का छोटा भाई, फातिमा और अली की बातें सुन रहा था।

फातिमा को एक दिन फोन आता है। वह फोन पर बोलते ही रोने लगती है। अली फातिमा को रोते देखकर पूछता है कि क्या हुआ और फातिमा क्यों रो रही है?फातिमा कहती है कि मेरी चाची अब नहीं है। उनका समय खत्म हो गया है। चाचा के यहाँ जल्द ही जाना होगा।

यह सुनकर अली ने कहा कि फातिमा, रो मत, मैं भी चाचा के यहाँ चलता हूँ। तब अली अपने भाई अकरम से कहता है कि हलवे पराठे की ठेली लगाओ जब तक मैं नहीं आता। और सुनिश्चित करना कि मेरे ग्राहकों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। याद रखना कि हलवा बनाने के लिए मैं दूकान से अच्छी गुणवत्ता और मंहगा सामान खरीदता हूँ, इसलिए सस्ते की ओर मत जाओ। अली इतना कहकर चला जाता है।

अकरम फिर हलवे पराठे की ठेली लगाने लगता है। ग्राहक आकर हलवा पराठा खाते हैं। अकरम पाता है कि पराठा बनाने के लिए पर्याप्त तेल नहीं है। अकरम सोचता है कि अगली सुबह वह दूकान से सब कुछ खरीद लेगा।

अकरम अगली सुबह सामान खरीदने दूकान जाता है और सोचता है कि उसके घर में इसका क्या उपयोग होगा, इसलिए सस्ता तेल खरीद लेता है। लोग रोज़ की तरह ठेले पर आते हैं और हलवा पराठा खाते हैं। लेकिन कुछ देर बाद दो ग्राहक आते हैं; हमने तुम्हारे यहाँ से हलवा खाया और थक गए। हम आपके बड़े भाई अली से बात करते हैं कि इसे कैसे बनाया गया है। अकरम को यह सुनकर डर लगता है, क्योंकि वह कई दिनों से मिलावटी तेल में बना हलवा पराठा बेच रहा था।

यह बात जब अली को पता चलती है, वह अकरम को बहुत डांटता है और उसे लोगों से माफी मांगने को कहता है। अकरम को अपनी गलती का एहसास होता है और लोगों से माफी मांगता है और कहता है कि वह अपने किये पर बहुत पछतावा करता है।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें दूसरों को अपना मतलब नहीं बताना चाहिए। ईमानदारी और मेहनत से कमाया धन जीवन को खुशी और सुख देता है।

भेड़िये और सारस का किस्सा

एक बार जंगल में एक भूखा और प्यासा भेड़िया भटक रहा था। लंबे समय तक भूखा प्यासा भटकने के बाद, भेड़िया ने शिकार के लिए एक जानवर को देखा और उसे मारकर खा लिया. जानवर की हड्डी भेड़िये के गले में फंस गई जब वह खा रहा था।

बहुत कोशिश करने पर भी भेड़िये के गले में हड्डी नहीं लगी। गली में हड्डी लेकर परेशान होने के बाद मैं इधर-उधर घूमने लगा कि कोई मुझे हड्डी निकालने में मदद कर दे. लेकिन कोई भी जानवर मुझे मदद करने को तैयार नहीं था।

लंबे समय तक भटकने के बाद भेड़िया एक सारस (stork) से मिले. उसने सारस को अपनी सारी परेशानी बताई। Saras ने फिर कहा कि अगर मैं तुम्हारी मदद करूँ तो तुम मुझे क्या दोगे? उसने फिर कहा कि अगर तुम मेरी मदद करो तो मैं तुम्हें इनाम दूंगा। इनाम के लालच में सारस भेड़िया मदद करने को तैयार था।

अब सारस ने भेड़िये के मुंह में अपनी लंबी चोंच डालकर गले में फंसी हड्डी को बाहर निकाला। जैसे ही सारस ने भेड़िया की गले में फंसी हड्डी निकाली, भेड़िया बहुत खुश होकर चला गया। यह देखकर सारस ने कहा कि आप मदद करने के बदले मुझे इनाम देंगे। और आप जा रहे हैं, यह गलत है।

तब भेड़िया ने सारस से कहा कि अगर तुम मेरे मुंह में अपनी गर्दन डाल देते हो तो तुम्हारा इनाम यह होगा कि तुम जीवित रहोगे। Saras इसे सुनकर बहुत दुखी हुआ।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि स्वार्थी लोगों का साथ नहीं देना चाहिए। जीवन में स्वार्थी लोगों से हमेशा दूर रहें।

एक दोस्त की कहानी

बहुत पहले एक जंगल में एक मेंढक समूह रहता था। एक दिन सभी मेंढकों ने तय किया कि आज हम पूरे जंगल घूमेंगे। सभी मेंढक यात्रा पर चले गए। बाद में, समूह के दो मेंढक गहरे गड्ढे में गिर जाते हैं। बाद में दोनों मेढक बाहर निकलने की बहुत कोशिश करते हैं, लेकिन वे नहीं कर पाते

यह सब देखकर उन दोनों मेंढकों के साथी गड्ढे के बाहर तेज आवाज में चिल्ला रहे थे। और वे आपस में बात करते हुए कह रहे थे कि कोशिश बेकार है। कितनी भी कोशिश करो, गड्ढे से बाहर निकल नहीं पाओगे।

गड्ढे में मौजूद दोनों मेंढकों में से एक गड्ढे के बाहर सभी मेंढकों की बातें सुन रहा था। यह सुनकर गड्ढे में मौजूद मेंढक बहुत निराश हो गया और गड्ढे से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा. निराश होकर, मेंढक अपनी जान दे दी। लेकिन दूसरा मेंढक अभी भी पूरी तरह से गड्ढे से बाहर निकलने की कोशिश करता था। और गड्ढे के बाहर सभी मेंढक उसे मजाक बना रहे थे और हंस रहे थे।

बार-बार प्रयास करने के बाद, दूसरे मेंढक ने गड्ढे से बाहर निकलने के लिए एक लंबी छलांग लगाई। यह देखकर सभी मेंढक हैरान हो गए। जब सभी ने पूछा कि वह इसे कैसे किया, तो मेंढक ने कहा कि वह बहरा था और बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि उसे लगा कि बाकी सभी मेंढक उसे उत्साहित करने के लिए उछल रहे हैं।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): उपरोक्त मेंढक की कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में किसी की भी बुरी बात नहीं सुननी चाहिए। हम अपने काम में सफल हो सकते हैं अगर हम दूसरों की नकारात्मक बातों पर ध्यान देने की बजाय सकारात्मक सोच का अभ्यास करें।

चूहे और शेर की कहानी

शेर और चूहे की कहानी (Lion and Mouse’s Story)
एक बार एक जंगल में शेर और चूहा जंगल का राजा थे। जब शेर गहरी नींद में सो रहा था, एक चूहा बिल से बाहर निकलकर उछल कूद करने लगा। चूहे ने इस तरह उछल कूद कर शेर को जगाया और उसे पकड़ लिया।

शेर ने चूहे को पकड़ा तो वह बहुत डर गया। शेर ने चूहे को डराते हुए कहा, “तुमने मेरी नींद खराब की है, अब मैं तुम्हें खाकर अपनी भूख मिटाऊंगा।” चूहे ने जंगल के राजा से कहा कि मुझ छोटे से जीव को खाने से आपकी भूख नहीं मिटेगी, इसलिए मुझे मत खाइए।

हे शेर राजा, मैं चाहता हूँ कि आप मुझे छोड़ दें. मैं आपकी मदद कर सकता हूँ अगर आपको कोई मुसीबत आती है। यह सुनते ही शेर हंस पड़ा। तुम इतने छोटे हो कि मेरी मदद करोगे? तुम्हारी विनती पर आज मैं तुम्हें छोड़ देता हूँ, लेकिन अगली बार मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा। शेर ने इसके बाद चूहे को छोड़ दिया।

कुछ दिन बाद, शेर खाने की तलाश में जंगल में भटक रहा था, तभी एक शिकारी ने एक जाल फैलाया। शेर अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगा। लेकिन खुद को नहीं छुड़ा पाया। कुछ देर बाद शेर दहाड़ मारने लगा। चूहा शेर की दहाड़ सुनकर वहाँ आ गया। चूहा शेर को जाल में फंसा देखकर तुरंत उसके पास गया।

चूहे ने शेर को जाल में फंसा देखते ही अपने तेज दांतों से जाल काटना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद, चूहे ने पूरा जाल काट लिया। जाल काटने के बाद शेर स्वतंत्र हुआ। शेर ने चूहे की इस मदद से बहुत भावुक हो गया। उस दिन से, शेर ने चूहे को धन्यवाद दिया और दोनों अच्छे दोस्त बन गए।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): यह कहानी हमें सिर्फ शरीर के आधार पर किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझने की सीख देती है।

हाथी और सियार का किस्सा

जंगल में एक सियार और एक हाथी था। जंगल में भूखा सियार भटक रहा था। वन में घूमते हुए सियार एक स्थान पर पहुंचा जहां उसने हांथी को देखा। सियार ने हांथी को देखा तो मुंह में पानी आ गया। सियार हांथी को खाने का विचार करने लगा।

यह विचार करते हुए सियार हांथी के पास गया। इस जंगल में बहुत से जानवर रहते हैं, लेकिन आपसे बड़ा और बुद्धिमान कोई भी जानवर नहीं है, सियार ने हाथी से कहा। आप जंगल का राजा बनना चाहेंगे? हाथी ने सियार की बात सुनी। हाथी ने सियार को जंगल का राजा बनने की अनुमति दी।

हाथी ने हाँ कहा तो सियार ने कहा कि तुम मेरे साथ चलो। सियार के साथ हाथी खुशी से चला गया। सियार एक तालाब के पास हाथी ले गया। सियार ने कहा कि तालाब में नहाने जाओ। तालाब में बहुत गंदगी थी। हाथी तालाब में उतर गया, क्योंकि वह राजा बन गया था। तालाब में उतरते ही हाथी धंसने लगे।

हाथी ने सियार से कहा, तुम मुझे तालाब में कैसे ले आये? मैं इसमें धंसता ही जा रहा हूँ। यह सुनकर सियार हँसने लगा। मैं तुम्हें अपना शिकार बनाना चाहता था, सियार ने कहा।

यह सुनकर हाथी रोने लगा। हाथी ने तालाब से भागने की बहुत कोशिश की। लेकिन निकल नहीं पाया। धीरे-धीरे दलदल में हाथी धंसने लगा। सियार हाथी को दलदल में फंसा देखकर तालाब में उतर गया। बाद में हाथी दलदल में फंसकर मर गया।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): उपरोक्त कहानी बताती है कि जो व्यक्ति दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद भी उसी गड्ढे में गिर जाता है।

एक छोटी सी चिड़िया की कहानी

यह बहुत पहले की बात है। एक बहुत बड़ा घना जंगल था। एक बार जंगल में एक बहुत बड़ी आग लग गई। आग देखकर सभी जानवर डर गए और बचने के लिए हर जगह भागने लगे।

जंगल में आग लगने से काफी भगदड़ हुई थी। प्रत्येक व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए हर जगह भाग रहा था। इस जंगल में एक छोटी सी चिड़िया भी थी। चिड़ियों को देखकर हर जीव भयभीत हो गया। इस जंगल में आग लगी है, और मुझे जानवरों की मदद करनी चाहिए।

यह विचार करते हुए छोटी चिड़िया एक नदी के पास चली गई। नदी में जाने के बाद, चिड़ियाँ अपनी छोटी सी चोंच में पानी भरकर आग बुझाने लगी। एक उल्लू ने चिड़ियों को देखकर सोचा कि वे बहुत मूर्ख हैं। इसके द्वारा लाया गया इतना भीषण पानी कहाँ बुझेगा?

उल्लू चिड़िया के पास गया और देखा कि तुम्हारे लाये पानी से यह आग कहाँ बुझेगी। चिड़ियों ने विनम्रता से कहा कि चाहे आग कितनी भी भयंकर हो, मैं सिर्फ अपना प्रयास करता रहूँगा।

यह सुनकर उल्लू बहुत प्रभावित हो गया और चिड़ियों के साथ आग बुझाने लगा।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): कहानी हमें सिखाती है कि मुसीबत कितनी भी बड़ी हो, हमें कोशिश करना चाहिए।

गधे की कहानी और धोबी की कहानी

एक धोबी था। उसका गधा था। गधा बहुत कम खाने-पीने से कमजोर हो गया। एक दिन धोबी ने एक मृत बाघ पाया। धोबी ने सोचा कि बाघ की खाल को गधे पर रखकर उसे पड़ोसियों के खेत में चरने के लिए छोड़ दूँगा।

किसान गधे को देखकर मानेंगे कि यह एक वास्तविक बाघ है। डरकर दूर रहेंगे, और गधा आराम से सारा खेत चर लेगा। धोबी ने योजना बनाकर तुरंत इसे लागू किया।

रात में गधा खेत चर रहा था। बाद में गधे को किसी गधे की रेंकने की आवाज आई। यह आवाज सुनकर गधा इतना उत्साहित हो गया कि वह रेंगने लगा। गधे के चिल्लाने से लोगों को गधे की असलियत पता चली। और गधे को लोगों ने बहुत पीटा।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): ऊपर दी गई कहानी हमें बताती है कि सच्चाई कभी छिपी नहीं रहती। वह अक्सर बाहर आती है।

एक बुढ़े व्यक्ति की कहानी

एक बार एक गांव में एक बूढ़ा रहता था। पूरे गाँव में बूढ़े व्यक्ति को हर कोई बुरा समझता था। बूढ़े आदमी की अजीब आदतों से पूरा गांव परेशान था। उस बूढ़े व्यक्ति से सारा गाँव थक गया थ

वृद्ध व्यक्ति हमेशा सबसे ज्यादा नाराज़ रहता था। नतीजतन, बुढ़िया हमेशा उदास और चिड़चिड़ा रहता था।

वृद्ध व्यक्ति का दुःख हर दिन बढ़ता जाता है। बूढ़े व्यक्ति की बातें लोगों को तीर की तरह लगीं। हर कोई उस बुढ़ापे से बात करने से बचता था। वास्तव में, बूढ़े व्यक्ति का दुर्भाग्य हर किसी के लिए खतरनाक था।

उस बूढ़े व्यक्ति से जो भी मिलता था, सारा दिन बुरा लगता था, क्योंकि लोगों को लगता था कि एक बुढ़े व्यक्ति के बगल में रहना अस्वाभाविक और अपमानजनक था। वृद्ध व्यक्ति के पास होने से लोग बहुत दुखी होते थे।

लेकिन एक दिन ऐसा हुआ तो बूढ़ा व्यक्ति सभी को बहुत खुश दिखाई देता था। ऐसा हुआ कि आज 80 वर्ष का बूढ़ा व्यक्ति था। पुरे गाँव में इसकी आग फैल गई। आज का बुढ़िया किसी से कोई शिकायत नहीं कर रहा था। पहली बार किसी बूढ़े व्यक्ति को इतना खुश देखा गया।

गाँव के सभी लोग एकत्र हो गए। सब लोग यह जानना चाहते थे कि आज एक वृद्ध व्यक्ति इतना खुश क्यों है. एक आदमी ने वृद्ध व्यक्ति से पूछा, “आपको क्या हुआ है?”आज इतना खुश क्यों हो?

“आज कुछ खास नहीं,” बूढ़ा व्यक्ति ने कहा। ८० वर्षों से मैं खुशी की खोज कर रहा हूँ। पर मैं कभी खुश नहीं हुआ। जीवन भर मेरी यह खोज बेकार रही। लेकिन आज मैंने सोचा कि अब से मैं खुशी की तलाश में नहीं जीऊंगा और मैं खुश हूँ कि मैं ऐसा कर रहा हूँ।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): इस कहानी ने हमें सिखाया कि जीवन में खुशी पाने के लिए उसके पीछे भागना नहीं चाहिए। जब आप अपने जीवन को खुशी से जीते हैं, तो आप खुश हो जाएंगे।

लोमड़ी और अंगूर

बहुत पहले, एक जंगल में एक चतुर लोमड़ी रहती थी। भूखी लोमड़ी एक दिन पूरे जंगल में भटकती रही। लोमड़ी ने पूरे जंगल को छान मारा, लेकिन उसे कुछ खाने को नहीं मिला। पूरे वन में खाने की तलाश में भटकती हुई लोमड़ी थक गई और एक पेड़ के नीचे बैठ गई

लोमड़ी बैठे-बैठे सो गई। लोमड़ी ने कुछ समय सोने के बाद अपनी आँखें खोली और देखा कि एक पेड़ पर रसभरे अंगूर पके हुए थे। लोमड़ी ने अंगूर को देखा तो मुंह में पानी आ गया। लोमड़ी अंगूर खाने की कोशिश करने लगी। लेकिन बार-बार प्रयास करने पर भी लोमड़ी ने अंगूर नहीं पाया। पेड़ पर काफी ऊंचाई पर अंगूर लगे हुए थे। लोमड़ी ने थककर कहा कि मैं अंगूर नहीं खाती क्योंकि वे खट्टे हैं।

नगर में कितने तोते हैं!

एक बार अकबर बादशाह ने अपनी बैठक में मौजूद सभी से एक अजीब सवाल पूछा: हमारे नगर में कितने तोते हैं? सभा में सभी लोग इस प्रश्न से हैरान थे। तब बीरबल बैठक में आए। क्या पूछा?

बादशाह अकबर ने फिर से सवाल पूछा, तो बीरबल ने कहा कि बादशाह अकबर हमारे नगर में 20,523 तोते हैं। बीरबल का जवाब सुनकर सब लोग हैरान हो गए।

सभा में हर कोई सोच रहा था कि बीरबल यह जवाब कैसे जानता था? बाद में बीरबल ने बादशाह अकबर से कहा कि उन्हें अपने आदमियों को तोते गिनने के लिए कहना चाहिए।

बादशाह, आपके द्वारा भेजे गए आदमियों को ज्यादा तोते मिलते हैं, तो इसका अर्थ है कि तोते के रिश्तेदार दूसरे शहर से आए होंगे। और अगर नगर में कम तोते हैं, तो वे जरूर दूसरे नगर में अपने रिश्तेदारों से मिलने गए होंगे।

बादशाह अकबर को बीरबल का यह उत्तर बहुत पसंद आया। अकबर ने खुश होकर बीरबल को मोती और हीरे की एक जड़ी माला दी। बाद में अकबर ने बीरबल की समझदारी की बहुत प्रशंसा की।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): उपरोक्त कहानी हमें सिखाती है कि किसी प्रश्न का उत्तर तर्कपूर्ण होना चाहिए।

जादुई बॉल की कहानी:

बहुत पहले, एक छोटा लड़का जिसका नाम श्याम था, एक बगीचे में एक बरगद के नीचे खेल रहा था। बच्चे ने बगीचे में खेलते हुए एक क्रिस्टल बॉल खोजी। यह एक जादुई क्रिस्टल बॉल थी जो किसी भी इच्छा पूरी कर सकती थी।

यह जानकर बच्चा बहुत खुश हुआ कि उसे जादुई बॉल मिल गई। बॉल को पाते ही बच्चे ने उसे अपने बैग में डाल दिया। बच्चे ने सोचा कि वह बॉल को अपने पास रखेगा जब तक उसकी इच्छाएं पूरी नहीं होंगी।

दिन बीत गए, लेकिन बच्चे को जादुई बॉल से क्या मांगना चाहिए था पता नहीं था। श्याम का एक दोस्त राम एक दिन उसके पास आया. उसने क्रिस्टल बॉल को बैग से निकाल लिया जब वह उसके पास थी। तब राम बॉल लेकर गांव में घूमने लगा।

गाँव में बॉल को देखकर हर कोई धन, महल और सोना चांदी की मांग करने लगा। लेकिन हर किसी को सिर्फ अपनी एक ही इच्छा पूरी करने का अवसर मिला। अंततः सभी को अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं करने का पछतावा हो रहा था। क्योंकि लोगों को लगता था कि वे अपनी आवश्यकताओं को नहीं पाए।

सभी गाँववासी दुखी होकर श्याम के पास पहुंचे। श्याम ने सब देखकर बॉल से कहा कि सब कुछ पहले जैसा होना चाहिए। जब बोल ने पहले की तरह सब कुछ किया, तो सभी ने श्याम को धन्यवाद दिया। श्याम ने बहुत सूझबूझ से काम किया।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): इस कहानी से हमें पता चलता है कि बहुत अधिक धन, सोना और चांदी भी हमें खुशी और सुख नहीं दे सकते। जीएवं में हमें जो कुछ मिला है, उसे मान लें। तभी जीवन सुखमय होगा।

बातूनी कछुए की व्यथा

एक बार एक तालाब में एक कछुआ दो हंसों का जोड़ा रहा था। हंस और कछुआ बहुत ही दोस्त थे। वह बहुत बातूनी था, बहुत हंसता और शाम होते ही अपने घर चला जाता था।

तालाब के स्थान पर एक बार बारिश नहीं हुई, तो तालाब सूखने लगा। कछुए को चिंता होने लगी कि गर्मी के मौसम में तालाब पूरी तरह से सुख जाएगा या नहीं। इस पर, कछुआ हंसों के पास गया और कहा, “तुम आस-पास जाओ और एक तालाब खोजो जहां पानी हो, जहां हम रह सकें।”

पास के एक गाँव में हंसों ने पानी से भरा एक तालाब पाया। उन्होंने कछुए को जाकर बताया। तुम मुझे भी वहां ले चलो, कछुए ने हंसते हुए कहा। हंसों ने कहा, ठीक है, हम तुम्हें एक लकड़ी पर बिठा देंगे और तुम्हें ले चलेंगे। बस एक शर्त है कि आप पूरे रास्ते मुंह बंद रखेंगे। तुम गिर जाओगे अगर मुंह खोलोगे। कछुए ने सही वादा किया था।

तब दोनों हंसों ने लकड़ी को एक-एक कोने से अपनी चोंच में दबा लिया, और कछुए ने लकड़ी को बीच में से अपने मुंह में पकड़ लिया। रास्ते में एक गाँव आया जब दोनों हंसकर कछुए को लेकर आसमान में उड़ रहे थे। जब सभी बच्चे गाँव में खेल रहे थे, वे चिल्लाने लगे कि कछुआ आसमान में उड़ रहा है।

कछुआ यह सुनकर नीचे देखने लगा। कछुए ने यह सब नहीं देखा। कछुआ हंसते हुए बात करने के लिए मुंह खोला, तो लकड़ी टूट गई, और कछुआ हंसते हुए गांव में गिर गया।

कछुआ बहुत ऊंचाई से गिरने से बहुत चोट लगी और थोड़ी देर बाद तड़पकर मर गया।

कहानी से सीख (Short Story In Hindi): कहानी हमें बताती है कि बुद्धिमान लोग शांत और चुप रहते हैं, जबकि मूर्ख लोग चंचल और अपने आप को नियंत्रित नहीं कर सकते।

कबूतर और चींटी की कहानी

गर्मियों के दिनों में एक चींटी पानी की तलाश में जंगल में घूमती थी। प्यासी चींटी ने लंबे समय तक भटकने के बाद एक नदी को देखा। चींटी को नदी देखकर बहुत खुशी हुई। पानी पीने के लिए प्यासी चींटी एक छोटी सी चट्टान पर चढ़ी, लेकिन फिसलकर नदी में गिर गई

चींटी नदी में गिर गई और डूबने लगी। नदी के पास एक कबूतर था. वह एक पेड़ पर बैठकर देखता था कि चींटी को तुरंत मदद की जरूरत है। कबूतर एक पेड़ से पत्ता लेकर उड़ गया। तब कबूतर ने पत्ता नदी में फेंक दिया। तब चींटी तैरकर एक पत्ते पर चढ़ गई, जिससे पत्ता बहकर नदी के किनारे आ गया। चींटी बाद में नदी किनारे आ गई और बच गई।

इस घटना से चींटी और कबूतर दोस्त बन गए। दोनों खुश होकर एक दूसरे के साथ रहने लगे। फिर जंगल में एक शिकारी आया। शिकारी ने एक कबूतर को पेड़ पर बैठे देखा और बन्दूक से उसे मारने के लिए निशाना साधा।

लेकिन पास में खड़ी चींटी जो सब देख रही थी, तुरंत शिकारी के पास चली गई। और चींटी ने शिकारी के पैर पर पूरी ताकत से काटा। जो शिकारी को दर्द से चिल्लाने लगा। शिकारी की बंदूक गिर गई। कबूतर ने शिकारी की आवाज़ सुनकर उसे देखा। कबूतर तत्काल वहां से उड़ गया।

शिकारी चला गया, तो कबूतर ने चींटी को धन्यवाद दिया। हम देखते हैं कि कबूतर और चींटी एक दूसरे के काम आते हैं।

कहानी से सीख: उपरोक्त कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में अच्छे काम और नेकी कभी बेकार नहीं जाते। यदि आप अच्छे काम करते रहते हैं तो उनके परिणाम जरूर आपको मिलेंगे।

प्रश्न और उत्तर:(FAQs)

चूहे और शेर की कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
शेर और चूहे की कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें किसी व्यक्ति की क्षमता को उसके शरीर के आकर पर नहीं आंकना चाहिए।

नैतिक शिक्षा में क्या सिखाती है?

शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य का प्रशिक्षण, शिष्टाचार, उपयुक्त सामाजिक आचरण, नागरिक अधिकार- कर्त्तव्य और धार्मिक प्रशिक्षण आदि क्रियाएं समाहित हैं।

बच्चों के लिए नैतिक कहानी क्या है?

छोटी-छोटी कहानी होती है और इस कहानी से हमे जो सीख या ज्ञान मिलती है उसे Moral of the Story in Hindi या कहानी से सीख कहते हैं।

मोरल का मतलब क्या होता है?

किसी कथा या घटना से हमे जो नीतिगत सन्देश प्राप्त होता है, उसे सीख या शिक्षा (moral) कहते हैं।

नैतिक शिक्षा कैसे दें?

सभी का आदर करना, हिंसा न करना, कभी झूठ न बोलना, सभी से प्रेम करना, लोगों की सहायता करना 

दोस्तों, हमें उम्मीद है ये सभी कहानियाँ आपको पसन्द आई होगी आज हमने “Short Story In Hindi With Moral” नैतिक कहानी के बारे में बताया।

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