Motivational Short Story In Hindi – प्रेरणादायक हिंदी कहानियाँ

इस लेख में हम आपको एक प्रेरणादायक कहानियाँ “Motivational Short Story In Hindi” पेश करेंगे जो आपके जीवन में नई दिशा देने के साथ-साथ आपको अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के मार्ग में प्रेरित करेगी।

जीवन में हमें कई बार ऐसे समय आते हैं जब हम डाहिने-बाएँ मुड़ते हैं और सही दिशा में न बढ़ पाते हैं। इस लेख में हम आपके साथ एक ऐसी प्रेरणादायक लघुकथा साझा कर रहे हैं जो आपको जीवन के मुश्किल समयों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

Motivational Short Story In Hindi : हिंदी कहानियाँ

गुस्सा करने से पहले सोचिये (Motivational Short Story)

बहुत पहले, एक लड़का एक गाँव में रहता था। वह गुस्सैला था और छोटी-छोटी बातों पर लोगों को बदनाम करता था।
उसकी इस आदत से परेशान होकर उसके पिता ने एक दिन उसे एक थैला दिया और कहा, “अब जब भी तुम गुस्सा आये तो इस थैले मैं से एक कील निकालना और बाड़े में ठोक देना।”

गुस्सा करने से पहले सोचिये (Motivational Short Story)

पहले दिन, उसने लड़के को चालीस बार गुस्सा करके इतनी ही कीलें बाड़े में ठोंक दी। पर जब कीलों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगी, तो उसे लगने लगा कि अपने गुस्से को नियंत्रित करना इतनी मेहनत करने से अच्छा है.

अगले कुछ हफ्तों में, वह अपने गुस्से को बहुत हद तक नियंत्रित करना सीख गया। और फिर एक दिन आया कि उस लड़के ने दिन भर गुस्सा नहीं किया।

उसने अपने पिता से कहा कि, “अब हर उस दिन जिस दिन तुम एक बार भी गुस्सा ना करो इस बाड़े से एक कील निकाल निकाल देना।”

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लड़के ने ऐसा ही किया; कुछ समय बाद, वह बाड़े में लगी आखिरी कील भी निकाल कर खुशी से अपने पिता को बताया।

“बेटे, तुमने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन क्या तुम बाड़े में हुए छेदों को देख पा रहे हो?” पिताजी ने फिर उसका हाथ पकड़कर बाड़े के पास ले गए।

बाड़ा अब कभी भी वैसा नहीं हो सकता जैसा वह था। पहले, जब आप क्रोध में कुछ कहते थे, तो आपके शब्द भी सामने वाले व्यक्ति पर बहुत बुरा प्रभाव डालते थे। यही कारण है कि अगली बार आप क्रोधित होने से पहले विचार करें कि क्या आप भी उस बाड़े में अधिक कीलें ठोकना चाहते हैं।

मंदिर के पुजारी (Motivational Story in Hindi)

एक बाबूजी ने बहुत से विद्यालय बनवाए थे । कई स्थानों पर सेवाश्रम चलाते थे । दान करते करते उन्होंने अपना लगभग सारा धन खर्च कर दिया था । बहुत सी संस्थाओं को वह सदा दान देते थे ।

अखबारों में उनका नाम छपता था । वे भी स्वर्ण पत्र लेने आए; किंतु उनके हाथ में जाकर भी वह मिट्टी का हो गया । पुजारी ने उनसे कहा – ” आप पद मान या यश के लोभ से दान करते जान पड़ते हैं! नाम की इच्छा से होने वाला दान सच्चा दान नहीं है । ” इसी प्रकार बहुत से लोग आए किंतु कोई भी स्वर्ण पत्र पा नहीं सका ।

सबके हाथों में पहुंचकर वह मिट्टी का हो जाता था । कई महीने बीत गए बहुत से लोग स्वर्ण पत्र पाने के लोग से भगवान विश्वनाथ के मंदिर के पास ही दान पुण्य करने लगे! लेकिन स्वर्ण पत्र उन्हें भी नहीं मिला । एक दिन एक बूढ़ा किसान भगवान विश्वनाथ के दर्शन करने आया । वह देहाती किसान था ।

उसके कपड़े मैले और फटे थे । वह केवल विश्वनाथ जी का दर्शन करने आया था । उसके पास कपड़े में बांध थोड़ा सत्तू और एक कट्टा कंबल था । मंदिर के पास लोग गरीबों को कपड़े और पूरी मिठाई बांट रहे थे; किंतु एक कोदी मंदिर से दूर पड़ा कराह रहा था । उससे उठा नहीं जाता था ।

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उसके सारे शरीर में घाव थे । वह भूखा था । किंतु उसकी ओर कोई देखता तक नहीं था । बूढ़े किसान को कोदी पर दया आ गई । उसने अपना सत्तू उसे खाने को दे दिया और अपना कंबल उसे उदा दिया । फिर वहां से वह मंदिर में दर्शन करने आया । मंदिर के पुजारी ने अब नियम बना लिया था कि सोमवार को जीतने यात्री दर्शन करने आते थे । सबके हाथ में एक बार वह स्वर्ण पत्र रखते थे ।

बूढ़ा किसान जब विश्वनाथ जी का दर्शन करके मंदिर से निकला पुजारी ने स्वर्ण पत्र उसके हाथ में रख दिया उसके हाथ में जाते ही स्वर्ण पत्र में जड़े रत्न दुगुने प्रकाश से चमकने लगे । सब लोग बुड्ढे की प्रशंसा करने लगे । ।

पुजारी ने कहा – ” यह स्वर्ण पत्र तुम्हें विश्वनाथ जी ने दिया है । जो निर्लोभ हैं, जो दिनों पर दया करता है । बिना किसी स्वार्थ के दान करता है और दुखियों की सेवा करता है, वही सबसे बड़ा पुण्यात्मा है ।

Gautam Buddha Ki Kahani – Stories Of Buddha In Hindi

गौतम बुद्ध एक श्रमण थे। जिनके शिक्षाओं पर बौद्ध धर्म का प्रचलन हुआ। गौतम बुद्ध अपने विवाह के उपरांत ही अपने पुत्र और पत्नी को त्याग कर संसार को जरा, मरण ,दुख से मुक्ति दिलाने के मार्ग की तलाश एवं सत्य दिव्य ज्ञान की खोज में रात में राजपाट छोड़कर चले गए। वर्षों की कठोर तपस्या के बाद बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, और वे सिद्धार्थ गौतम से गौतम बुद्ध बन गए।

गौतम बुद्ध से संबंधित सभी कहानियाँ जो आपके जीवन को सही तरीके से जीने का मार्गदर्शन दे सकती है।

इंतिजार का फल (Motivational Story in Hindi)

“सब्र का फल मीठा होता हैं।” इस मुहावरे को आपने जरूर सुना होगा। आज हम इस कहानी से इसका अर्थ जानेंगे। इस कहानी में श्री नारद मुनि बताते हैं कि तारों को ईर्ष्या क्यों होती है और मुहावरे का अर्थ क्या है। यह कहानी बहुत सुंदर और प्रेरणादायक है। आप इसे पूरा पढ़ना चाहिए।

जब सूरज अस्त हो रहा होता है, हल्की-हल्की संध्या आती है और चारों ओर शांत वातावरण जैसा अंधेरा छा जाता है। जब हल्की हवा चलने लगती है, सभी जीव-जंतु और पशु-पक्षी अपने निवास स्थान को चले जाते हैं। जब हम आसमान की ओर देखते हैं, तो सूर्य अस्त होते-होते आसमान में तारे दिखाई देते हैं।

तारे कम चमकीले होते हैं, लेकिन कुछ बहुत चमकीले होते हैं। कम चमकीले तारों पर हमारी नजर कम ही जाती है, लेकिन अधिक चमकीले तारों पर हमारी नजर जल्दी पहुंचती है। यही कारण है कि हम उन पर ध्यान नहीं दे पाते और उनकी खूबसूरती कम हो जाती है।

लेकिन उनमें से एक बहुत चमकीला तारा है। इसके आने से सारा ब्रह्मांड जगमगा जाता है। स्वाति नक्षत्र, जिसे हम स्वाति नाम से जानते हैं, इतना सुंदर और चमकीला है कि उसके प्रकाश से लोगों के चेहरे प्रसन्न हो जाते हैं।

वह इतना चमकीला और सुंदर है कि लोग उसे देखकर खुश होते हैं. इसलिए स्वाति नक्षत्र दूसरे नक्षत्रों से इर्ष्या करती है और श्री नारद मुनि को बताती है।

नारद मुनि ने सभी तारों को समझाते हुए कहा कि देखो जो भी सब्र करता है, उसकी कीर्ति संसार में होती है और मुझे लगता है कि आप लोग धैर्य नहीं करते हैं। यही कारण है कि लोग संध्या होते ही तुरंत जगमगाने लगते हैं।

लेकिन जब स्वाति नक्षत्र बहुत देर बाद आसमान में आता है, तो उसकी प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ जाती है।

तभी सभी लोग मुस्कुराने लगे। इसलिए कहा जाता है कि सब्र करना चाहिए क्योंकि उसका फल मीठा है।

यदि आप देर में आसमान में टिमटिमाते हैं, तो आप महत्वपूर्ण होंगे और लोग आपको अलग नाम से जानेंगे। नारद मुनि ने सभी तारों को बताया।

हम सब जानते हैं कि सब्र का फल मीठा होता है और इसे महसूस भी किया है। मैं हमेशा अपने काम को पूरा करने के बाद उसके परिणाम के इंतजार में उतावला हो जाता हूं या फिर आने वाले काम को पूरा करने के लिए उतावला हो जाता हूं, जिससे मेरा आने वाला काम बिगड़ जाता है।

लेकिन मुझे सब्र करना चाहिए और ऐसा नहीं करना चाहिए। उस परिणाम या आने वाले कार्य का जिसे मैं अच्छे से पूरा करूँ और उसका अच्छा परिणाम मिलेगा।

हम सब जानते हैं कि जल्दी से लगाया गया लक्ष्य हमेशा लक्ष्य से बाहर जाता है। हम जीवन में सफलता पाने के लिए उस लक्ष्य को धैर्यपूर्वक भेजना चाहिए। हम सफलता के लिए धैर्यपूर्वक काम करना चाहिए।

विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य को संतुलित रखने और आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए नए तरीके खोजने के लिए धैर्य एक शक्ति है।

बड़े-बड़े विद्वानों ने कहा है कि सब्र रखना चाहिए और चिंता नहीं करना चाहिए क्योंकि सफलता जल से आती है। परिणाम सफल होगा।

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सोचकर बोले (Motivational Short Story In Hindi)

हमारे बोली हुई बातें वापस नहीं आती, इसलिए हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए। इस कहनी को समझिए।

एक किसान ने अपने पडोसी को बुरा कहा, लेकिन जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत से मिलने लगा। उसने संत से अपने शब्द वापस लेने के लिए क्या करना चाहिए था?

“खूब सारे पंख इकट्ठा कर लो, और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो,” संत ने किसान से कहा। किसान ने ऐसा ही किया और संत के पास गया।अब जाओ और उन पंखों को इकट्ठा करके वापस ले आओ, संत ने कहा।

जब किसान वापस गया, सारे पंख हवा में उड़ चुके थे। और किसान खाली हाथ संत से मिल गया। तब संत ने उससे कहा कि तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ भी ऐसा होता है; आप आसानी से अपने मुख से निकाल सकते हैं, लेकिन चाहकर भी वापस नहीं ले सकते।

इस कहानी से हम क्या सीखते हैं: इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि किसी को बुरा कहना सिर्फ उसे परेशान करने के लिए होता है, लेकिन बाद में वह खुद को परेशान करता है। परेशान रहने से क्या फायदा?

परिश्रम का फल (Motivational Short Story)

एक कृषक था। उसकी चार संतान थीं। हर कोई आलसी था। किसान को लगता था कि मेरे कोई भी पुत्र सफल नहीं हैं।उसे जीवन में सफलता मिलने के लिए क्या सिखाना चाहिए? किसान वृद्ध हो गया था। किसान एक दिन ज्यादा बीमार हो गया। उन्हें बचने की उम्मीद कम थी।

उसने अपने चारो बेटे को फोन किया और बताया कि एक बड़े कलश में लगभग दस लाख रुपये किसी स्थान पर जमीन में डाल दिए हैं। किसान ने इतना कहते ही अपनी अंतिम साँस निकाली।

चारों भाई ने पहले पिता का दाहसंकार करना चाहा।खेत की जमीन तब खोदेंगे।ऐसा ही सोचा और किया। पूरा खेत खोद डाला। रूपये नहीं मिले, लेकिन खेत में बोआई की गई फसल अच्छी लगी और काफी उपजा। सभी भाई बहुत खुश थे।

जीवन का सफर: सपनों की ओर (Motivational Short Story)

जब हम सपनों की दुनिया में खो जाते हैं, तो हमारे पास जीने का एक नया मार्ग मिलता है। राज एक सामान्य से गाँव का छोटा सा छोटा लड़का था, लेकिन उसके सपने बड़े थे। उसका सपना था कि वह दुनिया को अपनी कहानी से प्रेरित करेगा।

संघर्ष की दिशा में कदम: असफलता से सीख

जब राज ने अपनी कहानी को लिखने की कोशिश की, तो उसे कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। लेकिन उसने हार नहीं मानी, बल्कि हर बार असफलता से नई सिख निकाली। उसने सीखा कि संघर्ष ही सफलता की कुंजी है और असफलता से हारना मतलब हार नहीं मानना है।

सफलता की ऊँचाइयों की ओर: परिश्रम और आत्मविश्वास

राज ने कई सालों तक मेहनत और आत्मविश्वास से अपने सपने की पुर्ति की। उसने न सिर्फ खुद को मजबूत बनाया, बल्कि दुसरों को भी प्रेरित किया। उसकी कहानी आज हमें यह सिख देती है कि अगर हम मेहनत करें और खुद में विश्वास रखें, तो कुछ भी संभव है।

आपके सपनों को हासिल करने के लिए 5 महत्वपूर्ण सिख

  1. संघर्ष ही सफलता की कुंजी है: आपके मार्ग में आने वाली मुश्किलें ही आपको आपके लक्ष्य तक पहुँचाएंगी।
  2. आत्मविश्वास का महत्व: खुद में विश्वास रखना आपको हर कदम पर आगे बढ़ने में मदद करेगा।
  3. मेहनत से ही सफलता: सफलता के लिए मेहनत करना और समर्पित रहना आवश्यक है।
  4. सपनों की ओर बढ़ते रहें: जीवन में निरंतरता बनाए रखकर ही हम सपनों को हासिल कर सकते हैं।
  5. दूसरों की प्रेरणा बनें: अपनी सफलता की कहानी को सुनाकर आप दूसरों को भी प्रेरित कर सकते हैं।

आपके सवाल(FAQs)

Q: क्या हमें हमेशा सफल होने के लिए तैयार रहना चाहिए?

A: जी नहीं, सफलता में संघर्ष भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि संघर्ष ही हमें और भी महत्वपूर्ण सिख सिखाता है।

Q: क्या आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है?

A: जी हाँ, आत्मविश्वास से ही हम कठिनाइयों का सामना करके आगे बढ़ सकते हैं।

Q: क्या सपनों की पुर्ति के लिए मेहनत करना आवश्यक है?

A: हाँ, सपनों की पुर्ति के लिए मेहनत और समर्पण आवश्यक है, क्योंकि बिना मेहनत के कुछ भी मिला नहीं करता।

निष्कर्ष

जीवन में सफलता पाने के लिए संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और सही दिशा में चलना महत्वपूर्ण है। हमें राज की कहानी से यह सिख मिलती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हमारी मेहनत और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो हम सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं।

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