Hartalika Teej Vrat Vidhi In Hindi : हरतालिका तीज व्रत कथा

“Hartalika Teej Vrat Vidhi In Hindi” हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का व्रत सबसे बड़ा व्रत माना जाता है। तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार अधिकतर महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। यह व्रत खासकर सुहागिन महिलाएं करती हैं। मान्यता है कि हरितालिका तीज का व्रत विधि-विधान से करने से महिलाओं को अनंत सौभाग्य मिलता है। हरतालिका व्रत पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, नियम, पारण विधि और नियमों को जानें !

Hartalika Teej Vrat Vidhi In Hindi : हरितालिका तीज व्रत

हरितालिका तीज एक महिला प्रधान व्रत है। इस दिन महिलायें खाने-पीने के बिना व्रत रखती हैं। यह व्रत की शक्ति का बेहतरीन उदाहरण है। व्रत का संदेश है कि हम अपने जीवन लक्ष्यों को पूरा करने का निश्चय करें। सत्ता के सामने सब कुछ असंभव लगता है। माता पार्वती ने जगत को बताया कि ईश्वर भी शक्तिशाली हैं।

हरितालिका तीज व्रत विधि

हरितालिका तीज का व्रत महिलाएं पूजती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं, जिससे उन्हें सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और इसकी विधि निम्नलिखित है:

सामग्री:

  • दीपक, धूप, अगरबत्ती
  • पूजन सामग्री: रोली, अक्षत, सिन्दूर, हल्दी, मोली
  • पूजनीय फल, फूल
  • नैवेद्य: मिश्रित पकवान, मिठाई
  • गंगाजल, पंचामृत, पानी

व्रत विधि:

  1. सुबह स्नान करके शुद्ध और साफ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा स्थल को सफाई करें और उसे सजाएं।
  3. भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमाओं को पूजें।
  4. रोली, अक्षत, सिन्दूर, हल्दी, मोली से प्रतिमा का पूजन करें।
  5. फल, फूल, दीपक, धूप, अगरबत्ती का आराधना करें।
  6. भगवान की पूजा के बाद प्रसाद बांटें और सभी को खिलाएं।
  7. पूजन सामग्री का चढ़ावा करें और आरती उतारें।
  8. व्रत कथा सुनें और व्रत की महत्वपूर्णता को समझें।
  9. पूजन सामग्री को परिक्रमा करें और फिर उसे अपने आप पर डाल दें।
  10. गंगाजल, पंचामृत, पानी से प्रतिमा की अभिषेक करें और उसे प्रसाद के रूप में चढ़ावा करें।
  11. व्रत की संपूर्णता के साथ भगवान की आराधना करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।

इस रूप में, हरितालिका तीज का व्रत विधि अनुसरण करके महिलाएं भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और उनके आशीर्वाद से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति करती हैं।

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हरतालिका तीज व्रत कथा : Haritalika Teej Vrat Katha in Hindi

हरतालिका तीज व्रत कथा : Haritalika Teej Vrat Katha

हे गौरी, बचपन में तुमने पर्वतराज हिमालय पर स्थित गंगा के तट पर बारह वर्षों तक अधोमुखी होकर कठोर तपस्या की थी। तुमने इतनी देर तक सिर्फ पेड़ों से सूखे पत्ते चबाए। माघ की विक्राल शीतलता में आप लगातार जल में प्रवेश करके तप रहे थे। तुमने वैशाख की जला देने वाली गर्मी में पंचाग्नि से अपने शरीर को जला दिया।

Hartalika Teej Vrat Vidhi In Hindi

श्रावण की मूसलधार वर्षा में खुले आसमान के नीचे समय बिना खाने-पीने के बिताया।तुम्हारी कष्टप्रद तपस्या को देखकर आपके पिता बहुत दुखी हो गए। वे बहुत निराश थे। तब एक दिन नारदजी आपके घर आया और आपके पिता की दुःख को देखा। तुम्हारे पिता ने अतिथि को दिल से स्वागत करके उनके आने का कारण पूछा।

गिरिराज! मैं भगवान विष्णु के भेजने पर यहां आया हूँ, कहा नारद। आपकी कन्या ने बहुत मेहनत की है। वे इससे खुश होकर आपकी सुपुत्री से शादी करना चाहेंगे। इस विषय में आपकी प्रतिक्रिया जानना चाहता हूँ। गिरिराज ने नारद की बात सुनकर खुश हो गए। उन्हें लगता है कि उनके सारे दुःख दूर हो गए हैं।

उन्हें प्रसन्नता हुई और वे बोले, “भगवान! यदि विष्णु स्वयं मेरी कन्या का वरण करना चाहते हैं तो मुझे क्या आपत्ति हो सकती है?” वे असली ब्रह्म हैं। हे महर्षि! हर पिता चाहता है कि उसकी पुत्री उसके पति के घर की लक्ष्मी बने। पिता की सार्थकता इसी में है कि उसकी पुत्री पिता के घर जाकर पिता के घर से अधिक खुश रहे।

तुम्हारे पिता की स्वीकृति मिलने पर नारदजी विष्णु से मिले और उनसे तुम्हारे विवाह की घोषणा की। मगर जब आप इस विवाह संबंध की बात सुनने लगे, तो आप दुखी हो गए। तुम्हारी एक सखी ने तुम्हारी मानसिक स्थिति को समझा और उसने उस विकलांगता का कारण जानना चाहा। तब आपने कहा कि मैंने पूरी तरह से भगवान शिव का वरण किया है, लेकिन मेरे पिता ने विष्णु से शादी करने का फैसला किया है।

हरतालिका तीज व्रत, कथा, पूजा विधि, मुहूर्त 2023

मैं एक अजीब धर्म-संकट में हूँ। क्या करूँ? अब आत्महत्या ही एकमात्र विकल्प है। आपकी सखी बहुत बुद्धिमान और सूझबूझ वाली थी। उसने पूछा, “सखी! इसमें प्राण त्यागने का क्या उद्देश्य है?” संकट के समय धैर्य रखना चाहिए। नारी का जीवन सही है अगर वह अपने पति के रूप में हृदय से उसे स्वीकार करके जीवन भर उसके साथ रहती है।

ईश्वर को भी सच्ची आस्था और निष्ठा के समक्ष समर्पण करना पड़ता है। मैं तुम्हें घनघोर जंगल में ले चलती हूं, जहां तुम्हारे पिता तुम्हें खोज भी नहीं पाते। वहां साधना में लीन हो जाना चाहिए। मुझे विश्वास है कि ईश्वर आपकी सहायता अवश्य करेगा। यही आपने किया। तुम्हारे पिता को घर पर नहीं पाकर बहुत दुःख हुआ। वे सोचने लगे कि आप अनजाने में चले गए हैं। मैं विष्णुजी से शादी करने का वचन दे चुका हूँ।

यदि भगवान विष्णु बारात लेकर आए और कन्या घर पर नहीं थी तो यह बहुत बदनाम होगा। मैं कहीं भी मुंह दिखाने योग्य नहीं रहूंगा। यह सब सोचकर गिरिराज ने आपकी तलाश शुरू कर दी। तुम्हारी खोज चलती रही और तुम अपनी सखी के साथ नदी के तट पर एक गुफा में मेरी पूजा कर रहे थे। हस्त नक्षत्र भाद्रपद शुक्ल तृतीया को था। उस दिन आपने रेत से एक शिवलिंग बनाकर व्रत किया। मैं पूरी रात मेरी प्रशंसा करता रहूँगा।

तुम्हारी इस दर्दनाक तपस्या से मेरा शरीर हिलने लगा। मेरी आस्था टूट गई। मैं तुरंत आपके पास पहुंचा और आपकी तपस्या से खुश होकर वर मांगने के लिए कहा। तब तुमने मुझे अपने सामने पाकर कहा कि मैं दिल से तुम्हें पति के रूप में वरण कर चुकी हूँ। यदि आप मेरी तपस्या से खुश होकर यहां आए हैं, तो मुझे अपनी अर्धांगिनी स्वीकार कर लीजिए। तब मैं कैलाश पर्वत पर लौट आया और “तथास्तु” कहा। प्रातः तुमने अपनी सहेली के साथ पूजा की पूरी सामग्री को नदी में डालकर व्रत किया। गिरिराज, अपने मित्र-बंधुओं और दरबारियों के साथ तुम्हें खोजते हुए वहां आ गए और तुम्हारी इस कष्टप्रद तपस्या का कारण और उसका उद्देश्य पूछा।

गिरिराज ने उस समय आपकी हालत देखकर बहुत दुखी हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। तुमने विनम्र स्वर में उनके आंसू पोंछते हुए कहा, “पिताजी! मैंने अपने जीवन का अधिकांश समय कठोर तपस्या में बिताया है।” परमेश्वर को अपने पति के रूप में पाना मेरी एकमात्र इच्छा थी। आज मैं अपनी कसौटी पर खरी उतर गया हूँ। आप विष्णुजी से शादी करने का फैसला कर चुके थे, इसलिए मैं घर छोड़कर अपने आराध्य की खोज में चली गई।

अब मैं आपके साथ घर जाऊंगा, लेकिन इस शर्त पर कि आप विष्णु से नहीं, बल्कि महादेव से शादी करेंगे। गिरिराज ने मान लिया और तुम्हें अपने घर ले गए। कुछ समय बाद, उन्होंने हम दोनों को विवाह सूत्र में बांध दिया, जैसा कि शास्त्रोक्त विधि है। हे पार्वती! भाद्रपद की शुक्ल तृतीया को तुमने जो व्रत किया था, उसी के कारण मैं तुमसे शादी कर सकता हूँ। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि मैं इस व्रत को करने वाली कुंआरियों को उनके चाहे हुए परिणाम देता हूँ। यही कारण है कि सौभाग्य चाहने वाली हर युवती को यह व्रत पूरी निष्ठुरता और आस्था से करना चाहिए।।

हरतालिका तीज व्रत कथा: Haritalika Teej

द्वापर युग में काशी के नगरीका नामक नगर में राजा बानसिंह रहते थे। उनकी कन्या का नाम ललिता था। वह राजकुमारी बहुत ही सुंदर और गुणवत्ता से युक्त थी, लेकिन उनके पिता की यह इच्छा थी कि वह उनकी कन्या को उनके मित्र के बेटे से विवाहित करें। लेकिन ललिता राजकुमार से प्रेम करती थी और उसके साथ ही अपने जीवन की शुरुआत करना चाहती थी।

एक दिन ललिता ने अपने प्रिय सखी सुरुचि से अपने दिल की बात कही और उसकी सहायता मांगी। सुरुचि ने उसे समझाया कि वह व्रत करके भगवान शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त कर सकती है और अपनी इच्छा पूरी कर सकती है। सुरुचि ने ललिता से कहा कि वह हरतालिका व्रत का पालन करे, जो कि भगवान शिव-पार्वती की पूजा के रूप में मनाया जाता है।

ललिता ने सुरुचि की सलाह मानते हुए हरतालिका व्रत का पालन किया। व्रत के दिन, वह बिना खाने पीने के ब्रत्त को आरंभ किया और पूजा के लिए बैठी। उसने भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की पूजा की और उन्हें मन से प्रार्थना की कि वह उनकी इच्छा पूरी करें।

भगवान शिव-पार्वती को ललिता की श्रद्धा और व्रत की भक्ति प्रिय आई। उन्होंने ललिता की प्रार्थना सुनी और उनकी इच्छा को पूरा किया। भगवान शिव-पार्वती ने ललिता की सहायता की और उनकी संख्या राजकुमार से विवाह कर दी।

इस प्रकार, ललिता ने हरतालिका व्रत के माध्यम से अपनी इच्छा को पूरा किया और उन्हें उनके प्रियतम के साथ खुशियाँ और समृद्धि प्राप्त हुई। इसके बाद से हरतालिका तीज को महिलाएं भगवान शिव-पार्वती की पूजा और भक्ति के रूप में मनाती हैं और इसके माध्यम से उनकी कामनाएं पूरी होने की कामना करती हैं।

FAQs: हरतालिका तीज

  1. हरतालिका तीज क्या है? हरतालिका तीज एक हिन्दू व्रत है जो महिलाएं भगवान शिव और पार्वती की पूजा करती हैं। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।
  2. हरतालिका तीज का क्या महत्व है? हरतालिका तीज को भगवान शिव-पार्वती की प्रेम कथा की याद में मनाया जाता है जिनकी मदद से राजकुमारी ललिता ने अपनी इच्छा को पूरा किया था। यह व्रत महिलाओं की शक्ति और सहायता की प्रतीक है।
  3. हरतालिका तीज को कैसे मनाया जाता है? हरतालिका तीज के दिन महिलाएं व्रत करके बिना खाने-पीने के ब्रत्त का पालन करती हैं। वे भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और उनकी कथा सुनती हैं।
  4. हरतालिका तीज के क्या फायदे होते हैं? हरतालिका तीज व्रत का पालन करने से महिलाओं को उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं और उन्हें सौभाग्य, सुख, और समृद्धि प्राप्त होती है। यह उनकी भगवान के प्रति भक्ति और श्रद्धा को भी बढ़ाता है।
  5. हरतालिका तीज के क्या प्रसिद्ध प्रसाद होते हैं? हरतालिका तीज के व्रत में मिश्रित पकवान, मिठाई, फल आदि को प्रसाद के रूप में चढ़ावा किया जाता है।
  6. हरतालिका तीज की कथा क्या है? हरतालिका तीज की कथा में राजकुमारी ललिता की प्रेम कथा बताई जाती है, जिन्होंने हरतालिका व्रत का पालन करके अपनी इच्छा को पूरा किया था।
  7. हरतालिका तीज का क्या इतिहास है? हरतालिका तीज का इतिहास पुराणों में मिलता है और यह भगवान शिव-पार्वती की प्रेम कथा के रूप में जाना जाता है।
  8. हरतालिका तीज के किस प्रकार की पूजा होती है? हरतालिका तीज में भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमाएं पूजी जाती हैं और व्रत कथा सुनी जाती है, जिनकी पूजा और आराधना के बाद प्रसाद बांटा जाता है।

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