Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi – हरितालिका तीज व्रत कथा

हरितालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi) हिन्दू धर्म में व्रतों का महत्वपूर्ण स्थान है, और हरितालिका तीज व्रत एक ऐसा व्रत है जो माता पार्वती और भगवान शिव के प्रति भक्ति और स्नेह का प्रतीक है। यह व्रत हिन्दू महिलाएँ खासतर सुख-सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करती हैं और इसका पालन महिलाओं के लिए बड़ा महत्वपूर्ण है। हरितालिका तीज व्रत कथा में हम जानेंगे कि इस व्रत का महत्व क्या है और कैसे इसे मनाया जाता है।

हरतालिका तीज व्रत 2023 (Hartalika Teej Vrat)

त्यौहार का नामहरतालिका तीज
दिनांक18 सितंबर
पूजा मुहूर्त 202318 सितंबर सुबह 6:05 बजे से 8:34 बजे तक
तिथिभाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि
आराध्यभगवान शिव

हरितालिका तीज व्रत कथा का आरंभ

हरितालिका तीज व्रत कथा की शुरुआत पार्वती माता के प्रति उनकी श्रद्धा और स्नेह से होती है। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जब पार्वती माता अपने पति भगवान शिव के साथ खुशी-खुशी विवाह करने की इच्छा रखती थी।

Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi – व्रत कथा

Hartalika Teej Vrat Katha– यह व्रत अच्छे पति की कामना से एवं पति की लम्बी उम्र के लिए किया जाता हैं, शिव जी ने माता पार्वती को विस्तार से इस व्रत का महत्व समझाया – माता गौरा ने सती के बाद हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया . बचपन से ही पार्वती भगवान शिव को वर के रूप में चाहती थी.

जिसके लिए पार्वती जी ने कठोर ताप किया उन्होंने कड़कती ठण्ड में पानी में खड़े रहकर, गर्मी में यज्ञ के सामने बैठकर यज्ञ किया. बारिश में जल में रहकर कठोर तपस्या की. बारह वर्षो तक निराहार पत्तो को खाकर पार्वती जी ने व्रत किया. उनकी इस निष्ठा से प्रभावित होकर भगवान् विष्णु ने हिमालय से पार्वती जी का हाथ विवाह हेतु माँगा.

जिससे हिमालय बहुत प्रसन्न हुए. और पार्वती को विवाह की बात बताई. जिससे पार्वती दुखी हो गई. और अपनी व्यथा सखी से कही और जीवन त्याग देने की बात कहने लगी. जिस पर सखी ने कहा यह वक्त ऐसी सोच का नहीं हैं और सखी पार्वती को हर कर वन में ले गई. जहाँ पार्वती ने छिपकर तपस्या की. जहाँ पार्वती को शिव ने आशीवाद दिया और पति रूप में मिलने का वर दिया.

हिमालय ने बहुत खोजा पर पार्वती ना मिली. बहुत वक्त बाद जब पार्वती मिली तब हिमालय ने इस दुःख एवं तपस्या का कारण पूछा तब पार्वती ने अपने दिल की बात पिता से कही. इसके बाद पुत्री हठ के करण पिता हिमालय ने पार्वती का विवाह शिव जी से तय किया.

इस प्रकार हरतालिक व्रत अवम पूजन प्रति वर्ष भादो की शुक्ल तृतीया को किया जाता हैं .

Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi

हरितालिका तीज कथा का महत्व (Hartalika Teej Mahtva)

भगवान गणेश का आशीर्वाद: हरितालिका तीज कथा के अनुसार, पार्वती माता को अपने विवाह के लिए भगवान गणेश की कृपा प्राप्त हुई थी। गणेश जी का आशीर्वाद उनके विवाह के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था और इसी कारण से हरितालिका तीज को विशेष भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

सुख-सौभाग्य की प्राप्ति: इस व्रत को मनाने से महिलाएँ अपने पतिव्रत्त की लंबी आयु और उनके साथ सुख-सौभाग्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मानती हैं।

हरितालिका तीज कथा का व्रत विधि

उपवास का महत्व: हरितालिका तीज व्रत कथा के दिन, महिलाएँ व्रत रखती हैं और बिना भोजन के उपवास करती हैं। इसका मतलब होता है कि वे दिन भर बिना किसी भोजन का सेवन नहीं करती हैं और इसके बजाय व्रती आहार का सेवन करती हैं, जिसमें सब्जियाँ, फल, और दूध की चाय शामिल होती है।

पूजा का महत्व: व्रती महिलाएँ पार्वती माता और भगवान शिव की मूर्तियों के सामने पूजा करती हैं और उन्हें अपने जीवन संगी के साथ खुशियाँ और सौभाग्य की कामना करती हैं।

हरितालिका तीज व्रत कथा के दिन का महत्व

सावधानियाँ: हरितालिका तीज कथा के दिन, व्रती महिलाएँ अपने व्रत की सफलता के लिए सावधानी बरतती हैं। वे सुबह जल स्नान करती हैं और सुन्दर साड़ी पहनती हैं।

पूजा का समय: पूजा का समय धूप, दीप, और सुगंधित धूप जलाने के साथ शुभ मुहूर्त में होता है। व्रती महिलाएँ अपने प्रिय देवता की पूजा करती हैं और उन्हें अपने जीवन संगी के साथ खुशियाँ और सौभाग्य की कामना करती हैं।

महिलाओं की समाज में महत्व: हरितालिका तीज व्रत कथा महिलाओं की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दिन महिलाएँ अपने पतिव्रत्त के साथ व्रत करके अपने प्यार और स्नेह का प्रतीक दिखाती हैं और समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

Hartalika Teej Vrat Katha In Hindi

हरतालिका तीज व्रत नियम (Hartalika Teej Vrat Rules)

हरतालिका तीज व्रत नियम (Hartalika Teej Vrat Rules): हरतालिका तीज व्रत एक महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति भक्ति और स्नेह का प्रतीक है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ मनाना चाहिए, और इसके नियमों का पालन करना जरूरी होता है। यहाँ हम हरतालिका तीज व्रत के मुख्य नियमों के बारे में जानेंगे:

  1. उपवास का पालन: हरतालिका तीज व्रत के दिन महिलाएँ निराहार रहती हैं, जिसका मतलब होता है कि वे दिनभर बिना किसी भोजन के रहती हैं। व्रत के दिन केवल फल, सब्जियाँ, और दूध की चाय सेवन कर सकती हैं।
  2. पूजा और व्रत की सुरुआत: हरतालिका तीज व्रत के दिन, व्रत की शुरुआत सुबह करनी चाहिए। व्रती महिलाएँ जल स्नान करके सुंदर साड़ी पहनती हैं और पूजा के लिए तैयार होती हैं।
  3. पूजा का महत्वपूर्ण समय: हरतालिका तीज व्रत कथा के दिन, व्रती महिलाएँ भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियों के सामने पूजा करती हैं। पूजा का समय शुभ मुहूर्त में होता है, और व्रती महिलाएँ धूप, दीप, और सुगंधित धूप जलाती हैं।
  4. महिलाओं की सहयोगिता: हरतालिका तीज व्रत के दिन, महिलाएँ अकेले व्रत नहीं करती हैं। वे अपनी सहयोगिता के साथ इस व्रत को मनाती हैं, और एक-दूसरे के साथ पूजा और व्रत का पालन करती हैं।
  5. परंपरागत वस्त्र संग्रहण: हरतालिका तीज व्रत के दिन, व्रती महिलाएँ परंपरागत भारतीय साड़ियों का पालन करती हैं। यह साड़ियाँ व्रत की शोभा बढ़ाती हैं और पूजा के समय सुंदरता को और बढ़ा देती हैं।
  6. ध्यान और मनन: हरतालिका तीज व्रत के दिन, व्रती महिलाएँ ध्यान और मनन करती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति अपनी भक्ति और स्नेह को मजबूती से व्यक्त करती हैं।
  7. पूजा के बाद भोजन: पूजा के बाद, व्रती महिलाएँ अपने व्रत को तोड़ती हैं और एक सामाजिक भोजन में शामिल होती हैं, जिसमें खास व्यंजन शामिल होते हैं।
  8. भक्ति और स्नेह की कामना: हरतालिका तीज व्रत के दिन, महिलाएँ भगवान शिव और माता पार्वती से अपने जीवन संगी के साथ सुख-सौभाग्य की कामना करती हैं और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति करती हैं।

नोट: हरतालिका तीज व्रत के नियमों का पालन करने से व्रत को साफलता मिलती है और महिलाओं के जीवन में खुशियों और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत को आपकी श्रद्धा और निष्ठा के साथ मनाना चाहिए और इसके नियमों का पूरा पालन करना चाहिए।

समापन

हरितालिका तीज व्रत कथा हिन्दू समाज में भक्ति और स्नेह का प्रतीक है। इस व्रत के माध्यम से महिलाएँ अपने पतिव्रत्त के साथ खुशियाँ और सौभाग्य की कामना करती हैं और भगवान गणेश के आशीर्वाद की प्राप्ति करती हैं। इस व्रत की पारंपरिक कथा और महत्व के साथ, हरितालिका तीज व्रत कथा व्रती महिलाओं के जीवन में खुशियों और सौभाग्य का प्रतीक बनता है।

FAQs : हरतालिका तीज व्रत

  1. हरतालिका तीज व्रत क्या है?
    • हरतालिका तीज व्रत एक हिन्दू परंपरागत व्रत है जो महिलाएँ भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति अपनी भक्ति और स्नेह का प्रतीक के रूप में मनाती हैं।
  2. हरतालिका तीज कब मनाई जाती है?
    • हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
  3. व्रत के दिन क्या नहीं खाया जा सकता है?
    • हरतालिका तीज व्रत के दिन व्रती महिलाएँ निराहार रहती हैं, इसलिए वे दिनभर बिना अनाज, दाल, और आलू के भोजन के साथ सब्जियाँ, फल, और दूध की चाय सेवन कर सकती हैं।
  4. हरतालिका तीज का महत्व क्या है?
    • इस व्रत को मनाने से महिलाएँ अपने पतिव्रत्त की लंबी आयु और साथ सुख-सौभाग्य की प्राप्ति की कामना करती हैं। इसके अलावा, भगवान गणेश के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत महत्वपूर्ण है।
  5. हरतालिका तीज कैसे मनाई जाती है?
    • हरतालिका तीज व्रत के दिन, महिलाएँ सुबह जल स्नान करती हैं और सुंदर साड़ी पहनती हैं। फिर वे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, धूप, दीप, और सुगंधित धूप जलाती हैं, और व्रत का पालन करती हैं। पूजा के बाद, व्रत को तोड़ने के बाद एक सामाजिक भोजन में शामिल होती हैं।
  6. हरतालिका तीज का महत्व समाज में क्या है?
    • हरतालिका तीज व्रत के द्वारा, महिलाएँ अपने पतिव्रत्त के साथ स्नेह और भक्ति का प्रतीक दिखाती हैं और समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस दिन को महिलाओं के लिए बड़ा महत्वपूर्ण माना जाता है और इसका पालन समाज में प्रतिष्ठित किया जाता है।
  7. हरतालिका तीज व्रत कथा क्या है?
    • हरतालिका तीज व्रत कथा के अनुसार, पार्वती माता ने अपने पति भगवान शिव के लिए व्रत का पालन किया और उनकी कृपा प्राप्त की। इससे इस व्रत का महत्व और महिलाओं के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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