गणेश चतुर्थी व्रत कथा: भगवान गणेश के प्रिय भक्त की कथा

Ganesh Chaturthi Vrat Katha In Hindi : गणेश चतुर्थी व्रत कथा हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान गणेश के प्रिय भक्त की कथा के माध्यम से हमें सिखाता है कि निष्कलंक भगवान की भक्ति और आस्था कैसे मनवाई जाए।

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भाद्रपद गणेश चतुर्थी व्रत का विधि : Ganesh Chaturthi Vrat Katha

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भाद्रपद गणेश चतुर्थी का व्रत बड़े श्रद्धा और भक्ति से किया जाता है। यहां भाद्रपद गणेश चतुर्थी व्रत की विधि दी जा रही है:

Ganesh Chaturthi Vrat Katha

पूजा सामग्री: (Ganesh Chaturthi Vrat Katha )

  1. गणेश भगवान की मूर्ति या पिक्चर
  2. जल (पूजन के लिए)
  3. दीपक और घी
  4. अगरबत्ती
  5. पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु और शर्करा का मिश्रण)
  6. संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा
  7. पूजन के लिए फूल, द्रव्य, रोली, चावल, कुमकुम, अक्षता

व्रत की विधि: (Ganesh Chaturthi Vrat Katha )

  1. व्रत की तैयारी: पहले तो सारे सामग्री को एकत्र करें।
  2. स्नान: व्रत के दिन सवेरे स्नान करके विशेष रूप से तैयार हो जाएं।
  3. पूजा स्थल: पूजा के लिए एक शुद्ध और साफ पूजा स्थल तैयार करें।
  4. मूर्ति स्थापना: गणेश भगवान की मूर्ति या पिक्चर को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
  5. पूजा: पूजा की शुरुआत करने से पहले पूजन सामग्री को एकत्रित करें। फूल, दीपक, अगरबत्ती, द्रव्य, पंचामृत, चावल, कुमकुम, अक्षता, रोली और घी की दीपक को तैयार करें।
  6. आरती और भजन: गणेश भगवान की पूजा के बाद उनकी आरती करें और भजन गाएं।
  7. प्रसाद: पूजा के बाद भगवान को विशेष रूप से अर्पण करने के लिए प्रसाद तैयार करें और फिर उसे भगवान की कृपा की प्रार्थना के साथ सभी परिवार के सदस्यों को दें।
  8. व्रत कथा का पाठ: गणेश चतुर्थी व्रत के दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।
  9. व्रत का पूरा होना: व्रत की समापन के बाद भगवान की कृपा का आभास होता है।

इस तरह से भाद्रपद गणेश चतुर्थी व्रत की विधि का पालन करके भगवान गणेश की कृपा प्राप्त की जा सकती है और जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति हो सकती है।

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भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा (Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha)

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी मनाई जाती है, जिसे व्रत करके गणेश भगवान की कृपा प्राप्त की जाती है। यह पर्व समुद्र मंथन के समय भगवान गणेश की पूजा की गई थी और उन्होंने चंद्रमा की बाजु में संकष्टी नामक देवी की कृपा प्राप्त की थी। इस दिन गणेश भगवान की पूजा के साथ-साथ उनकी कथा का पाठ भी किया जाता है।

कथा के अनुसार, दिन पुराने समय की बात है, किंग धनपति नामक एक राजा थे, जो अपने राज्य के प्रिय और सजीव मांसाहारी थे। एक दिन वह अपने बंदर शिकार के लिए जंगल गए। बंदरों का शिकार करते समय राजा ने एक बड़े ही दिव्य वृक्ष को कट दिया, जिससे कि वृक्ष की देवी संकष्टी बहुत दुखी हो गई।

वृक्ष देवी संकष्टी ने राजा की बड़ी दुराचारी करने की सजीवता को देखकर उनकी श्राप दिया कि वह एक संकष्टी (संकटों) से भरपूर जीवन जीना पड़ेगा, जिससे वह विपत्तियों से परेशान रहेंगे। राजा ने उस दिव्य वृक्ष की प्रतिमा को अपने राजमहल में स्थापित कर दिया और उसकी पूजा अनियमित रूप से करने लगे।

राजा के परिवार में बड़ी परेशानियाँ आने लगीं और उनकी संपत्ति तथा सुख-शांति चली गई। उन्होंने विचार किया कि उनकी दुर्दशा का कारण उनके पूर्व दुराचारों का प्रभाव है। फिर राजा ने एक महात्मा से सलाह ली और उन्हें वृक्ष देवी संकष्टी की कथा सुनाई। महात्मा ने उन्हें भगवान गणेश की भक्ति करने की सलाह दी और उन्हें भगवान गणेश के व्रत का तिथि और विधि बताई।

राजा ने महात्मा की सलाह मानकर गणेश भगवान की पूजा की और उनके व्रत का पालन किया। उन्होंने व्रत के बाद संकष्टी देवी की कृपा प्राप्त की और उनके सारे संकट दूर हो गए। इसके बाद से उन्होंने हमेशा भगवान गणेश की पूजा और व्रत का पालन किया और उनकी समृद्धि और सुख-शांति में वृद्धि हुई।

इस प्रकार, भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी कथा से प्रकट होता है कि गणेश भगवान की भक्ति और व्रत से संकष्टी नामक देवी की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने व व्रत करने से व्यक्ति को बुद्धि, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।

नोट: यह कथा केवल पौराणिक कथाओं पर आधारित है और इसका धार्मिक महत्व होता है।

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जानिए कब है Ganesh Chaturthi 2023 में।

Ganesh Chaturthi 2023:जल्द ही गणपति बप्पा सबके घर जाकर अपने भक्तों को आशीर्वाद देंगे और जो चाहेंगे वो करेंगे. यह तो सभी जानते हैं कि गणपति बप्पा को बुद्धि और अच्छाई का देवता माना जाता है और उन्हें वुघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। इसलिए ऐसा भी कहा जाता है कि जहां बप्पा रहते हैं वहां हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है. ऐसे में बप्पा की पूजा व्यर्थ न जाए, इसलिए यहां आप गणेश चतुर्थी 2023 का शुभ मुहूर्त, महत्व और प्रवेश प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त करें।

कब है गणेश उत्सव की शुरुआत हर साल की तरह इस साल भी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से Ganesh Chaturthi की शुरुआत होने जा रही है। वहीं 28 सितंबर 2023 को अनंत चतुर्थी वाले दिन समापन है। बता दें कि यह पर्व 10 दिनों तक चलेगा और 11 वें दिन बप्‍पा को पूरे धूमधाम के साथ विदा किया जायेगा और हर भक्त की जुबान पर बस बप्पा का नाम होगा। 

गणेश उत्सव का महत्व (Ganesh Chaturthi Vrat Katha )

गणेश उत्सव, जिसे गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण और प्रिय उत्सवों में से एक है। यह उत्सव भगवान गणेश के जन्म की खुशी में मनाया जाता है और इसका महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से होता है।

महत्व:

  1. भगवान गणेश की पूजा और आराधना: गणेश उत्सव में भगवान गणेश की पूजा और आराधना की जाती है। भगवान गणेश को विद्या, बुद्धि और संकटों से मुक्ति के देवता माना जाता है, इसलिए लोग उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए इस उत्सव को महत्वपूर्ण मानते हैं।
  2. सामाजिक एकता: गणेश उत्सव एक समुदाय में एकता और समरसता की भावना को प्रकट करता है। इस उत्सव के दौरान लोग एक साथ मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं और साथ में खान-पान भी करते हैं, जिससे समाज में सद्भावना और भाईचारे की भावना बढ़ती है।
  3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य: गणेश उत्सव का आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इस अवसर पर लोग भगवान गणेश के मूर्तियों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं, भजन की प्रस्तुति करते हैं और लोकरंगी आयोजनों में भाग लेते हैं, जिससे सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा होती है।
  4. धार्मिक उपदेश: गणेश उत्सव के दौरान गणेश भगवान की कथाएँ, किस्से और उपदेशों का प्रचार होता है। इसके माध्यम से लोग धार्मिक मूल्यों की महत्वपूर्णता को समझते हैं और उन्हें अपने जीवन में अमल करने की प्रेरणा मिलती है।
  5. विशेष भोजन: गणेश उत्सव के दौरान विशेष प्रकार के भोजन की तैयारी की जाती है जैसे कि मोदक, लड्डू आदि, जो गणेश भगवान की प्रिय भोजन माने जाते हैं। यह भोजन उनके पूजन में उपयोग होते हैं और उनकी प्रसन्नता का कारण बनते हैं।

गणेश उत्सव का महत्व धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यधिक होता है और यह उत्सव हिन्दू समुदाय के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण और आनंदमय समारोह होता है।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा : FAQs

1. गणेश चतुर्थी व्रत क्या है?

गणेश चतुर्थी व्रत हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है जिसमें भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है।

2. गणेश चतुर्थी व्रत कथा क्या है?

गणेश चतुर्थी की एक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने गोरखनाथ को एक पूत्र की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने उनकी इच्छा को पूरा करने के लिए गणेशजी की मूर्ति की रचना की और उसे प्राण प्रतिष्ठा की। इसके बाद, वहने गणेशजी को आत्मा में समाहित किया और उन्हें व्रत तथा पूजा के रूप में स्वीकार किया।

3. गणेश चतुर्थी व्रत कैसे मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लोग गणेशजी की मूर्तियों को अपने घरों में स्थापित करते हैं और उन्हें पूजते हैं। विशेष रूप से मोदक नामक प्रसाद को गणेशजी को अर्पित किया जाता है। यह व्रत भक्तों के द्वारा पूरे मन और श्रद्धा से किया जाता है और उन्हें देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।

4. गणेश चतुर्थी व्रत के महत्व क्या है?

गणेश चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की पूजा और भक्ति का प्रतीक है। यह व्रत श्रद्धा और विश्वास की एक प्रकार है और लोग इसके माध्यम से अपने जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और सफलता की प्राप्ति की कोशिश करते हैं।

5. गणेश चतुर्थी व्रत किस प्रकार से त्योहार मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी के दिन लोग मंदिरों में, घरों में और सार्वजनिक स्थलों पर गणेशजी की मूर्तियों की स्थापना करते हैं। उन्हें विशेष पूजा-अर्चना के साथ पूजा किया जाता है और विभिन्न प्रकार के प्रसाद भोग अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद, मूर्तियों का विसर्जन जल में किया जाता है।

निष्कर्ष:

गणेश चतुर्थी व्रत कथा से हमें यह सिखने को मिलता है कि श्रद्धा, विश्वास और प्रेम के साथ भगवान की पूजा करने से हम अपने जीवन में सफलता, सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। गणेशजी की कथा द्वारा हमें यह भी सिखाया जाता है कि अगर हम निष्कलंक भाव से भगवान की भक्ति करें तो हमारी मनोकामनाएँ पूरी हो सकती हैं।

गणेश चतुर्थी के दिन गणेशजी की पूजा करने से हमारे अंतरात्मा में पवित्रता और शुद्धता का आभास होता है। यह हमें अपने अवगुणों को छोड़कर उनकी भक्ति करने का संदेश देता है। गणेशजी की कथा से हमें यह भी प्रेरणा मिलती है कि हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपनी मेहनत और समर्पण से हर मुश्किल को पार करने की क़बिलियत रखते हैं और इसके द्वारा सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

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