Diwali Varat Katha In Hindi : दिवाली व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व,सामग्री, लक्ष्मी गणेश पूजा।

Diwali Varat Katha In Hindi : दिवाली, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का जश्न मनाने का समय है। यह त्योहार जहां अपनी चमकदार रोशनी और भव्य दावतों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं इसमें गहरा आध्यात्मिक संबंध भी शामिल है। दिवाली के दौरान लोगों द्वारा अपनी भक्ति व्यक्त करने का एक तरीका व्रत रखना है, जिसे ‘वरात’ के नाम से जाना जाता है।

Diwali Varat Katha in Hindi (दिवाली व्रत कथा)

Diwali Varat Katha: दिवाली के व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन माँ लक्ष्मी और भगवन श्री गणेश जी की पूजा की जाती है आइये दिवाली व्रत कथा (Diwali Varat Katha) को सुनते है।

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Diwali Varat Katha in Hindi: एक बार की बात है एक जंगल में एक सेठ रहता था। उसकी बेटी (सुमन) प्रतिदिन पीपल पर जल चढ़ाया करती थी। जिस पीपल के पेड़ पर वह जल चढ़ाया करती थी उस पर पर मां लक्ष्मी निवास करती थी। एक दिन मां लक्ष्मी ने सेठ  की बेटी (सुमन) से कहा मैं तुम्हारी मित्र बनना चाहती हूँ । यह सुनकर सेठ  की बेटी (सुमन) ने कहा मैं अपने पिता से पूछकर आपको बताऊंगी।

 बाद में सेठ  की बेटी (सुमन) अपने पिता के पास गई और अपने पिता से सारी बात कह डाली। दूसरे दिन सेठ  की बेटी (सुमन) ने मां लक्ष्मी से दोस्ती करने के लिए हां कर दी। दोनों अच्छी दोस्त बन गई। दोनों एक दूसरे के साथ खूब बातचीत करने लगी। एक दिन मां लक्ष्मी सेठ  की बेटी (सुमन) को अपने घर ले गई। मां लक्ष्मी ने सेठ  की बेटी (सुमन) का खूब स्वागत किया। उन्होंने उसे अनेक तरह का भोजन खिलाया।

Diwali Varat Katha in Hindi

जब सेठ  की बेटी (सुमन) मां लक्ष्मी के घर से वापस लौटी तो, मां लक्ष्मी ने उससे एक प्रश्न पूछा कि अब तुम मुझे कब अपने घर ले जाओगी। यह सुनकर सेठ  की बेटी (सुमन) ने मां लक्ष्मी को अपने घर आने को तो कह दिया लेकिन अपने घर की आर्थिक स्थिति को देखकर वह उदास हो गई। उसे डर लगने लगा कि क्या वह अपने दोस्त का अच्छे से स्वागत कर पाएगी। यह सोचकर वह मन ही मन दुखी हो गई। सेठ  अपनी बेटी (सुमन) के उदास चेहरे को देखकर समझ गया। तब उसने अपनी बेटी (सुमन) को समझाया कि तुम फौरन मिट्टी से चौका बनाकर साफ सफाई करो। चार बत्ती के मुख वाला दिया जलाकर मां लक्ष्मी का नाम लेकर वहां उनका स्मरण करों।

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पिता की यह बात सुनकर  उसने वैसा ही किया। उसी समय एक चील किसी रानी का नौलखा हार लेकर उड़ रहा था। अचानक वह हार सेठ  की बेटी (सुमन) के सामने गिर गया। तब सेठ  की बेटी (सुमन) ने जल्दी से वह हार बेचकर भोजन की तैयारी की। थोड़ी देर बाद भगवान श्री गणेश के साथ मां लक्ष्मी सेठ  की बेटी (सुमन) के घर आई। सेठ  की बेटी (सुमन) ने दोनों की खूब सेवा की। उसकी सेवा को देखकर मां लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने उसकी सारी पीड़ा को दूर कर दिया। इस तरह से सेठ  और उसकी बेटी (सुमन) अमीरों की तरह जीवन व्यतीत करने लगे।

दिवाली पूजा विधि (Diwali Puja Vidhi):

दिवाली पूजा, हिन्दू धर्म के एक महत्वपूर्ण त्योहार का हिस्सा है और इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लक्ष्मी गणेश पूजा दिवाली के दौरान एक महत्वपूर्ण पूजन आयोजन है, जिसे धर्मिक और पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। यह पूजा धन, सौभाग्य, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। निम्नलिखित हैं लक्ष्मी गणेश पूजा की विधि:

सामग्री:

  1. दीपक (घी का)
  2. दिवाली के दीपक (मोमबत्ती या तेल का दीपक)
  3. धूप बत्ती और अगरबत्ती
  4. फूलों का माला या फूल (मरिगोल्ड, रोज़, जास्मीन आदि)
  5. पुष्प और पुष्पवृष्टि की सामग्री
  6. राइस
  7. कुमकुम और हल्दी पाउडर
  8. फल (नर्मल और विशेष दिवाली फल)
  9. सिका या दक्षिणा
  10. गणेश और लक्ष्मी मूर्ति

पूजा की विधि:

  1. सबसे पहले, तैयारी का सामग्री का इकट्ठा करें।
  2. पूजा के स्थान को सफाई से सजाएं और एक साफ कपड़ा या आसन पर बैठें।
  3. अपने हाथों को धोकर सुखाने के बाद, शुद्ध दिमाग से पूजा के लिए तैयार हो जाएं।
  4. गणेश जी की पूजा से शुरू करें। गणेश मूर्ति को कुमकुम और हल्दी से सिर पर वर्णन करें और उन्हें पुष्पमाला और धूप के धुएं से सजाएं।
  5. गणेश जी को अपनी प्रार्थनाओं का आदान-प्रदान करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
  6. फिर लक्ष्मी माता की पूजा करें। लक्ष्मी मूर्ति को सजाएं, कुमकुम, हल्दी, फूलों का माला, और धूप के धुएं से पूजें।
  7. लक्ष्मी माता से धन, सौभाग्य, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।
  8. दीपावली के दीपक जलाएं। घर के चारों ओर दीपक जलाकर गृह को प्रकाशमय करें।
  9. फल, नर्मल और विशेष दिवाली फल को अर्पण करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
  10. अखंड दिया जलाने के बाद, धूप बत्ती और अगरबत्ती जलाएं।
  11. अखंड दिया का देखभाल करें और निरंतर प्रार्थना और ध्यान में रहें।
  12. आखिरी में, धूप बत्ती और अगरबत्ती को जलाने के बाद, प्रसाद को प्रसाद बनाकर उसे बांटें और सभी को प्रसाद खिलाएं।

इस तरह से, आप दिवाली पूजा को सम्पूर्ण कर सकते हैं और मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। याद रहे कि पूजा के दौरान आपका मन और दिल शुद्ध और ध्यानावस्थित होना चाहिए।

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दिवाली व्रत का महत्व (Mahatva of Diwali Vrat):

दिवाली व्रत या नियमित उपवास एक महत्वपूर्ण हिन्दू परंपरागत प्रथा है जो दिवाली त्योहार के दौरान महिलाएं और पुरुष दोनों करते हैं। इस व्रत का महत्व निम्नलिखित है:

  1. पूजा और व्रत के माध्यम से भगवान धन्य और सुखमय जीवन की प्राप्ति: दिवाली व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करना है। लक्ष्मी माता के आशीर्वाद से धन, सौभाग्य, और समृद्धि मिलती है, और इस व्रत के माध्यम से भक्त इन सभी आर्थिक और आध्यात्मिक लाभों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
  2. पवित्रता और सात्विक जीवनशैली को प्रोत्साहित करना: दिवाली व्रत के दौरान, व्रती व्यक्ति अन्याय, असभ्यता, और दुष्ट आचरण से दूर रहते हैं। इसके रूप में, व्रत उनके मानसिक और आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करता है और सात्विक जीवनशैली को प्रमोट करता है।
  3. समाज में सौहार्द और एकता का संदेश: दिवाली व्रत का पालन करने वाले लोग अपने परिवार और समाज के सदस्यों के साथ सौहार्द और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। इसके माध्यम से, व्रती लोग समाज में सद्गुण फैलाने का प्रयास करते हैं।
  4. प्रकृति के साथ सजीव संबंध की समझ: दिवाली व्रत के दौरान, व्रती व्यक्ति प्रकृति के साथ सजीव संबंध को समझते हैं और प्रकृति की सुरक्षा और सजीवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं।
  5. आध्यात्मिक विकास का माध्यम: दिवाली व्रत का पालन भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान, और आंतरिक शांति की ओर एक कदम बढ़ाता है। यह व्रत व्यक्ति को आत्मा के साथ अधिक जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।

दीपावली (FAQs)

1. दीपावली क्या होती है?

दीपावली, जिसे दिवाली भी कहा जाता है, भारत में मनाया जाने वाला प्रमुख हिन्दू त्योहार है। यह पूरे देश में खुशी के साथ मनाया जाता है और इसे “पटाकों का त्योहार” भी कहते हैं।

2. दीपावली पूजा क्या होती है?

दीपावली पूजा में भगवान लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसके लिए लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियों को विशेष रूप से सजाया जाता है और उन्हें प्रसाद और धूप के धुएं से भगवान की आराधना की जाती है।

3. दीपावली पूजा कब की जाती है?

दीपावली त्योहार का प्रमुख दिन अमावस्या को होता है, जो अक्टूबर और नवम्बर के बीच आता है। दीपावली की पूजा इस दिन मनाई जाती है।

4. दीपावली के पूजा सामग्री में क्या होता है?

दीपावली पूजा के सामग्री में दीपक, दीपावली के दीपक, धूप बत्ती, अगरबत्ती, फूल, पुष्प और पुष्पवृष्टि की सामग्री, राइस, कुमकुम, हल्दी पाउडर, फल, सिका या दक्षिणा, गणेश और लक्ष्मी मूर्ति शामिल होते हैं।

5. दीपावली पूजा की विधि क्या होती है?

दीपावली पूजा की विधि में गणेश और लक्ष्मी मूर्तियों की पूजा, दीपक जलाना, धूप और अगरबत्ती जलाना, पुष्पों का अर्पण, फल का अर्पण, और प्रसाद बनाने और बाँटने की प्रक्रिया शामिल होती है।

6. दीपावली के पूजा के क्या महत्व हैं?

दीपावली पूजा के माध्यम से लक्ष्मी और गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे धन, सौभाग्य, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, यह व्रत आध्यात्मिक और सात्विक जीवनशैली को प्रोत्साहित करता है और समाज में सौहार्द और एकता का संदेश प्रसारित करता है।

7. दीपावली पूजा के बाद क्या किया जाता है?

दीपावली पूजा के बाद, प्रसाद को बांटा जाता है और उसे सभी गरीब और दरिद्र लोगों को दिया जाता है। लोग आपसी स्नेहभावना के साथ एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हैं और गिफ्ट्स आपसी आदर्शन के रूप में भेजते हैं।

Conclusion:

Diwali Varat Katha, दीपावली पूजा हमारे धर्मिक और सामाजिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस त्योहार के द्वारा हम भगवान लक्ष्मी और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिससे हमारे जीवन में धन, सौभाग्य, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह त्योहार आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व का है, जो हमें सात्विक जीवनशैली की ओर प्रोत्साहित करता है और समाज में सौहार्द और एकता की भावना को मजबूत करता है। इस त्योहार के माध्यम से हम प्रकृति के साथ भी एक संबंध बनाते हैं और आध्यात्मिक विकास की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। इसलिए, दीपावली पूजा हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें धन्य और सुखमय जीवन की ओर अग्रसर करता है।

इस तरह, “Diwali Varat Katha In Hindi” दीपावली पूजा हिन्दू समुदाय में खुशियों और प्रेम का महत्वपूर्ण त्योहार है जिसमें भगवान की आराधना, परिवार और समुदाय के साथ समय बिताने का आनंद होता है।

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