छठ पूजा की पौराणिक कथा :कौन हैं छठ मैया और क्यों करते हैं इनकी पूजा, पढ़ें छठ व्रत कथा

Chhath Puja Vrat Katha In Hindi : जानिए छठ पूजा की पौराणिक कथा, छठ मैया के बारे में और इनकी पूजा के पीछे के कारण के बारे में। यहाँ पढ़ें छठ व्रत की विस्तृत कथा और इसके महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

छठ पूजा भारतीय उपमहाद्वीप में मनाई जाने वाली एक प्रमुख पर्व है, जिसमें सूर्य देवता और छठी मैया की पूजा की जाती है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। छठ पूजा का आयोजन कार्तिक मास के षष्ठी तिथि को किया जाता है, जिसे हिंदी पंचांग में ‘छठ’ कहा जाता है।

Chhath Puja Vrat Katha In Hindi

छठ पूजा व्रत का विधि

छठ पूजा व्रत का आयोजन विशेष तरीके से किया जाता है और इसके लिए कुछ स्पेशल सामग्री की आवश्यकता होती है। निम्नलिखित है छठ पूजा व्रत की विधि और सामग्री:

छठ पूजा व्रत की विधि:(Chhath Puja Vrat Katha)

  1. पहली दिन (नहाय खाय): छठ पूजा का आयोजन चौथे तिथि को शुरू होता है। पहले दिन व्रती को स्नान करना होता है और व्रत शुरू होता है। इस दिन केसरिया दूध और गुड़ वाली डाल की पाक की बनाई जाती है और व्रती इसे खाते हैं।
  2. दूसरी दिन (खाय): व्रती को दूसरे दिन बिना उपवास और नियमों के खाना खिलाना होता है।
  3. तीसरी दिन (सन्यारी): तीसरे दिन व्रती को खिचड़ी बनानी होती है, जिसमें चावल और मूंग दाल मिलाई जाती है। यह भोजन व्रती के परिवार के सभी सदस्यों को खिलाया जाता है।
  4. चौथी दिन (खाय): चौथे दिन भोजन करने के लिए व्रती को फल और सब्जियाँ दी जाती है।
  5. पांचवा दिन (पूजा और अर्घ्य): पांचवे दिन को सूर्योदय के समय छठी माता की पूजा की जाती है। व्रती और उनके परिवार सदस्य नदी या झील के किनारे जाते हैं और सूर्योदय के समय छठी माता की पूजा करते हैं। उन्हें अर्घ्य देना होता है और प्रासाद के रूप में थाली में चावल, दूध, और मिष्ठान रखी जाती है, जिन्हें पूजा के बाद व्रती खाते हैं।
  6. छठी दिन (पूजा और अर्घ्य): यह दिन भी पांचवे दिन की तरह होता है, जिसमें सूर्योदय के समय छठी माता की पूजा और अर्घ्य देना होता है।

छठ पूजा के लिए सामग्री:

  1. घाट: छठ पूजा के लिए एक पानी भरा घाट जरूरी होता है जिसे व्रती उपयोग करते हैं।
  2. पूजा सामग्री: छठी माता की पूजा के लिए दीपक, दीया, अगरबत्ती, गंध, कुमकुम, चावल, फूल, बेल पत्र, फल, नारियल, सिन्दूर, अख्शत आदि की आवश्यकता होती है।
  3. पूजा वस्त्र: छठ पूजा के दौरान व्रती को सफेद वस्त्र पहनना चाहिए।
  4. पूजा थाली: पूजा की सामग्री को रखने के लिए एक विशेष पूजा थाली की आवश्यकता होती है।
  5. खाद्य सामग्री: व्रत के दौरान व्रती को ब्रह्मणों को भोजन देने के लिए विशेष भोजन सामग्री की आवश्यकता होती है।

यह थी छठ पूजा व्रत (Chhath Puja Vrat Katha) की विधि और सामग्री का विवरण, जो व्रती को पूरे व्रत के दौरान अनुसरण करनी चाहिए।

यह भी पढ़े : जन्‍माष्‍टमी व्रत कथा: इसे सुनने से ही समस्‍त पापों का हो जाता है

छठ पूजा व्रत कथा : Chhath Puja Vrat Katha

Chhath Puja

Chhath Puja Vrat Katha: पौराणिक कथाओं के अनुसार हजारो साल पहले प्रियव्रत नाम का एक राजा रहता था। राजा के पत्नी का नाम नाम मालिनी था। इनका कोई संतान नहीं थी। राजा और रानी दोनों इस बात से बहुत दुखी रहते थे। की हमारा कोई संतान नहीं है आगे का अपना वंश कैसे बढ़ेगा। दोनों संतान प्राप्ति के लिए ऋषियों मुनि के पास जाते सन्तान प्राप्ति के उपाय पूछा करते थे। एक दिन राजा और रानी महर्षि कश्यप की सरण में गए और महर्षि कश्यप ने कहाँ हे राजन आपको यदि संतान की प्राप्ति चाहिए तो आपको संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाना होगा। महर्षि कश्यप के कहे अनुसार राजा प्रियव्रत ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। राजा का यह यज्ञ सफल हुआ और रानी प्रियव्रत गर्भवती हुईं।

रानी ने नव महीने बाद एक लडके को जन्म दिया। लेकिन रानी को मरा हुआ बेटा पैदा हुआ। यह बात सुनकर राजा और रानी दोनों बहुत दुखी हुए और उन्होंने संतान प्राप्ति की आशा छोड़ दी। राजा प्रियव्रत तो इतने दुखी थे। एक दिन उन्होंने आत्महत्या करने का मन बना लिया। राजा ने जैसे ही अपने मन में अपने शरीर को त्यागने के बारे में सोचा और राजा जैसे ही खुद को मारने के लिए आगे बढे तभी छठी मइया प्रकट हुईं और छठी मइया ने राजा को कहा हे राजन अगर आप उत्तम संतान की प्रप्ति चाहते हो तो आप छठी मैया का व्रत करो आपके ऊपर छठी मैया का आशीर्वाद अवशय ही प्राप्त होगा।

छठी मइया ने राजा से कहा कि जो भी व्यक्ति मेरी सच्चे मन से पूजा करता है मैं उन्हें पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं। यदि तुम भी मेरी पूजा करोगे तो तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। राजा प्रियव्रत ने छठी मइया की बात मानी और कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूजा की और छठ पूजा की व्रत कथा सुनी। माता षष्टी ने राजा और रानी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। इसके बाद राजा के घर में एक स्वस्थ्य सुंदर बालक ने जन्म लिया। तभी से छठ का पर्व पूरी श्रद्धा के साथ लोग मनाने लगें।

छठ मैया की कहानी (Chhath Puja Vrat Katha)

छठ पूजा की पौराणिक कथा अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहते हैं कि महाभारत काल में कौरवों के राजकुल में एक रानी थी, जिनका नाम द्रौपदी था। वह बहुत ही सुंदर और धर्मप्रिय थी। उसके पति युधिष्ठिर ने एक दिन बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया जिसमें वे बहुत सारे दान और भेट दिया करते थे। इस यज्ञ में उन्होंने द्रौपदी को भी बुलवाया, लेकिन वह अपनी अंतरात्मा से निरंतर यह विचार कर रही थी कि क्या वह उस यज्ञ में पहुँचे या नहीं।

Chhath Puja Vrat Katha

उसने अपने मन के विचार को यज्ञशाला की ओर बढ़ते हुए एक सिक्के के समान बना दिया। वह सिक्का उस ओर बढ़ा जिस ओर सूर्य देवता आ रहे थे। यहां तक कि उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने अपने आंसूओं से सिक्का भिगो दिया। सूर्य देवता ने उनकी भक्ति को देखकर अपने आकार को धरपकड़ लिया और उन्हें अपने साथ स्वर्ग ले गए।

छठ पूजा व्रत कथा का महत्त्व

छठ पूजा एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है, खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, और झारखंड में। यह त्योहार सूर्य देवता की पूजा के लिए मनाया जाता है और छठी माता की कथा पर आधारित है। छठ पूजा को छठी माता के प्रति भक्ति और आभार का प्रतीक माना जाता है।

छठ पूजा व्रत कथा (Chhath Puja Vrat Katha) में महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन होता है जो माता के भक्त के द्वारा उनकी आराधना करते समय हुई थी। छठी माता की कथा के अनुसार, एक समय की बात है, एक राजकुमारी अपने पिता के घर में व्रत के दौरान कई मन्यताओं का पालन करती थी। वायरस अपने परिवार के साथ बिना खाने पीने के एक सप्ताह की तपस्या के बाद ब्रह्मणों के पास गई और उनसे ब्रह्मणों की कथा और आशीर्वाद प्राप्त किए। उन्होंने व्रत के सही तरीके से पालन करने की मार्गदर्शना की और उन्हें बड़े आशीर्वाद प्राप्त हुए।

यह भी पढ़े : गणेश चतुर्थी व्रत कथा: भगवान गणेश के प्रिय भक्त की कथा

छठ पूजा का महत्त्व इस त्योहार में उत्सव और भक्ति की भावना को दर्शाता है। यह त्योहार सूर्य की पूजा के माध्यम से हमें प्राकृतिक ऊर्जा की महत्वपूर्णता को याद दिलाता है और हमें स्वास्थ्य और जीवन की दिशा में नये दृष्टिकोण प्रदान करता है। इसके साथ ही, छठी माता की कथा भक्ति, समर्पण, और उनकी कृपा के प्रतीक के रूप में हमें प्रेरित करती है।

छठ पूजा व्रत कथा (Chhath Puja Vrat Katha) का महत्त्व यह है कि यह हमें धार्मिक आदर्शों का पालन करने की महत्वपूर्णता दिखाता है और हमें समाज में उत्तम व्यवहार और नैतिकता की महत्वपूर्णता को समझाता है। छठ पूजा व्रत कथा के माध्यम से हम आत्म-संयम, संघटन और अनुष्ठान की महत्वपूर्णता को सीखते हैं, जो हमारे जीवन को सफलता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

यह भी पढ़े : श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा, पूजा की विधि, पूजा सामग्री

छठ पूजा कब और क्यों मनाया जाता है ?

छठ पूजा को भारत में नवम्बर-दिसम्बर महीनों में मनाया जाता है। यह पूरे हिन्दी पंचांग के अनुसार की जाती है और इसका आयोजन चार दिनों तक किया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है।

छठ पूजा का महत्व भारतीय संस्कृति में अत्यधिक होता है। इसे सूर्य देवता की पूजा के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें हिन्दू धर्म में जीवन का प्रमुख स्रोत माना जाता है। सूर्य देवता के साथ छठी माता, जिन्हें छठी माता के रूप में पुजा जाता है, की पूजा भी की जाती है।

छठ पूजा का उद्देश्य सूर्य देवता का आभार और प्रकाश करना है। सूर्य देवता हमारे जीवन के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह सभी प्राणियों को जीवन की ऊर्जा प्रदान करता है। छठ पूजा के दौरान व्रती सूर्योदय और सूर्यास्त के समय उनकी पूजा करते हैं, जिससे वे सूर्य देवता की कृपा प्राप्त कर सकें और उनके आशीर्वाद से उनके जीवन को सुखमय बना सकें।

छठ पूजा का अर्थ छठी माता के प्रति भक्ति और आभार की भावना को प्रकट करना भी होता है। छठी माता की कथा में उनके भक्त के उपास्य और पूजनीय स्वरूप का वर्णन होता है, जिससे भक्त उनकी कृपा प्राप्त कर सकें।

छठ पूजा का महत्व धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक होता है, और यह त्योहार लोगों के जीवन में सकारात्मकता, धार्मिकता और एकता की भावना को बढ़ावा देने में मदद करता है।

छठ पूजा कितने घंटे का होता है?

इस व्रत में 36 घंटों तक निर्जला रहना पड़ता है, छठ पूजा का पारंपरिक आयोजन चार दिनों तक होता है, जिसमें व्रती ने अपने आहार और पूजा की विशेष ध्यान देना होता है। छठ पूजा के पारंपरिक दिन निम्नलिखित होते हैं:

पहला दिन (नहाय खाय दिन): इस दिन व्रती को सूर्योदय के साथ ही नहाना चाहिए और उसके बाद विशेष आहार का सेवन करना चाहिए। इसमें केसरिया दूध, गन्ने के रस की डाल, और केला शामिल होता है।

दूसरा दिन (खाय दिन): इस दिन व्रती को नियमित आहार लेना चाहिए, जिसमें सात्विक और पूरी तरह से पाकित खाना शामिल होता है।

तीसरा दिन (सन्यारी दिन): इस दिन व्रती को खिचड़ी खानी चाहिए, जिसमें चावल और मूंग दाल होती है, और उसके साथ सात्विक सब्जियाँ और दही शामिल होता है।

चौथा दिन (खाय दिन): इस दिन व्रती को पूरी तरह से पाकित आहार खाना चाहिए, जिसमें फल, सब्जियाँ, और दूध शामिल होता है।

पांचवा दिन (उषा अर्घ्य दिन): इस दिन सूर्योदय के समय व्रती को सूर्य के समक्ष खड़े होकर छठी माता की पूजा करनी चाहिए और अर्घ्य देना चाहिए।

छठी दिन (सन्यारी दिन): इस दिन भी सूर्योदय के समय व्रती को सूर्य के समक्ष खड़े होकर छठी माता की पूजा करनी चाहिए और अर्घ्य देना चाहिए।

छठ पूजा के पारंपरिक दिनों में व्रती की पूजा और आहार की विशेष ध्यान देने के साथ-साथ व्रत के महत्व को महसूस करने का अवसर होता है।

यह भी पढ़े – श्री सत्यनारायण व्रत कथा, पूजा सामग्री, पूजा की विधि

छठ पूजा में क्या क्या नहीं करना चाहिए?

छठ पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है ताकि आपका व्रत सही तरीके से और पवित्र रूप में हो सके। निम्नलिखित हैं छठ पूजा में कुछ ऐसी बातें जिन्हें आपको करने और न करने चाहिए:

करने चाहिए:

  1. शुद्धि: व्रत की पूरी अवधि में आपको शुद्धि और सफाई की विशेष ध्यान देना चाहिए।
  2. सात्विक आहार: व्रत के दौरान सात्विक और पूरी तरह से पाकित आहार खाना चाहिए।
  3. पूजा और व्रत की नियमितता: पूजा और व्रती की नियमितता बनाए रखना चाहिए, और सभी पूजा प्रक्रियाओं का ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए।
  4. श्रद्धा और भक्ति: छठ पूजा के दौरान श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करनी चाहिए।

नहीं करने चाहिए:

  1. अनवश्यक व्रत तोड़ना: किसी भी व्रत को बिना आवश्यकता के तोड़ना या छोड़ना नहीं चाहिए।
  2. अत्यधिक तापस्या: छठ पूजा के दौरान अत्यधिक तापस्या न करें, क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य को खतरे में डाल सकता है।
  3. क्रूर प्राणी की हत्या: व्रत के दौरान क्रूर प्राणियों की हत्या करना या उन्हें नुकसान पहुँचाना नहीं चाहिए।
  4. कठिन और अशुद्ध विचार: व्रत के दौरान आपको कठिन और अशुद्ध विचारों को मन में नहीं आने देना चाहिए।
  5. अवैध उपासना: छठ पूजा के दौरान आपको किसी भी प्रकार की अवैध उपासना नहीं करनी चाहिए।

ये थे कुछ महत्वपूर्ण नियम और बातें जो आपको छठ पूजा के दौरान ध्यान में रखनी चाहिए और नहीं करनी चाहिए।

छठ पूजा के साथ जुड़े सवाल-जवाब (FAQs)

Q: छठ पूजा किस महीने मनाई जाती है?

A: छठ पूजा का आयोजन कार्तिक मास के षष्ठी तिथि को किया जाता है।

Q: छठी मैया का क्या महत्व है?

A: छठी मैया को सूर्य देव की प्रतिष्ठा मानी जाती है और उनकी पूजा से लोग उनके आशीर्वाद को प्राप्त करते हैं।

Q: छठ पूजा कितने दिनों तक चलती है?

A: छठ पूजा पांच दिन तक चलती है, जिनमें भक्तों को व्रत, नियम, और आराधना का पालन करना होता है।

Q: छठ पूजा की परंपरा कब से चल रही है?

A: छठ पूजा की परंपरा बहुत साल पहले से चल रही है, और यह भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

Q: छठ पूजा में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ खाए जाते हैं?

A: छठ पूजा में अरविंद की दाल, चावल, गन्ना, और कद्दू के परमल खाए जाते हैं, जो व्रती का भोजन बनते हैं।

Q: छठ पूजा का क्या महत्व है?

A: छठ पूजा का महत्वपूर्ण संदेश है कि हमें प्रकृति के साथ संगठन और समन्वय में रहना चाहिए।

Q: छठ मैया किसकी बेटी थी?

A: छठी मैया ब्रह्मा जी की मानस पुत्री हैं।

Q: छठ माता किसका अवतार है?

A:पार्वती का छठा रूप भगवान सूर्य की बहन छठी मैया को त्योहार की देवी के रूप में पूजा जाता है। 

निष्कर्ष

छठ पूजा (Chhath Puja Vrat Katha) एक प्राचीन और महत्वपूर्ण पर्व है जो हमें प्रकृति के महत्व को याद दिलाता है और हमें उसके साथ हमारे जीवन को समन्वित रखने का संदेश देता है। इस पर्व के माध्यम से हम छठी मैया की पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करते हैं।

छठ पूजा के दौरान छठी मैया की व्रत कथा का विशेष महत्व होता है। छठी मैया की व्रत कथा (Chhath Puja Vrat Katha) के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी की पत्नी रूद्राणी ने ब्रह्मा जी के आदेश के खिलाफ कुछ किया। इसके कारण उन्हें दुर्गा का शाप मिला कि वह स्त्री बनकर पृथ्वी पर आएंगी और उन्हें छठी मैया के रूप में पूजा जाएगी।

यह भी पढ़े :

सोमवार व्रत करने से भगवान शिव की होगी विशेष लाभ।
सोलह सोमवार व्रत कथा
सावन व्रत कथा के महिमा
हरतालिका तीज व्रत, कथा, पूजा विधि, मुहूर्त 2023
रविवार व्रत कथा

Leave a Comment