Bhai Dooj Vrat Katha In Hindi: भाई दूज की व्रत कथा से जानें क्यों मनाया जाता है ये त्योहार !

Bhai Dooj Vrat Katha In Hindi: भाई दूज दिवाली के बाद मनाया जाने वाला एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के प्रति प्यार और सम्मान दिखाती हैं। वे एक विशेष क्षेत्र बनाते हैं और एक साथ प्रार्थना करते हैं। फिर बहन अपने भाई के माथे पर टीका लगाती है और उसे स्वादिष्ट भोजन खिलाती है। उत्सव को पूरा करने के लिए भाई दूज की कहानी पढ़ना महत्वपूर्ण है।

Bhai Dooj Vrat Katha In Hindi

भाई दूज व्रत कथा: Bhai Dooj Vrat Katha In Hindi

बहुत समय पहले की बात है, सुर्यपुर नामक एक नगर में विशेष धर्मिक वातावरण था। वहां एक बड़े से श्रद्धालु ब्राह्मण रहते थे, जिनका नाम ब्राह्मण दीक्षित था। उनके पत्नी का नाम धृति था, और उनके दो पुत्र थे – बालक और प्रेमक।

ब्राह्मण दीक्षित ने अपने पुत्रों को वेद, शास्त्र, और धर्मशास्त्र का शिक्षा दी, और वे बहुत ही विद्वान बने। बालक और प्रेमक ने एक दूसरे के साथ अत्यंत प्रेम भरे भाई-बहन के रूप में रहते थे।

एक दिन, ब्राह्मण दीक्षित की मृत्यु हो गई। उनके अंतिम समय में वह अपने पुत्रों को साथ में बुलाएं और उन्हें धर्म की रक्षा करने का आदान-प्रदान करने का आदेश दिया।

ब्राह्मण दीक्षित की मृत्यु के बाद, बालक और प्रेमक ने अपने पिताजी के उपासना और आशीर्वाद का पालन करते हुए उनका स्मरण किया और धर्म का पालन करने का निश्चय किया।

कुछ सालों तक वे भाई-बहन मिलकर धर्म की पथ पर चलते रहे, और उनके पिताजी की आत्मा की शांति के लिए यज्ञों और पूजा-अर्चना करते रहे। इस उपासना में वे समृद्धि और शांति की प्राप्ति हुई।

Bhai Dooj Vrat Katha

इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाने का परंपरागत आदान-प्रदान हो गया, और इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंका बंधकर उन्हें तिलक लगाकर आशीर्वाद देती हैं। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और सजीव समर्थन का प्रतीक है, जो एक दूसरे के साथ बंधे हैं और जीवन के हर कदम पर एक दूसरे का साथ निभाते हैं।

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Faqs : भाई दूज व्रत

भाई दूज व्रत कैसे करें: भाई दूज व्रत को सही रूप से मनाने के लिए, सबसे पहले व्रत की नियमित शुरुआत करें। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंका बाँधती हैं और उन्हें तिलक लगाकर आशीर्वाद देती हैं। व्रत में भाई को स्वस्थ और धन्यवादी जीवन की कामना करें और भाई भी बहन को आशीर्वाद दे। इसके बाद, विशेष रूप से देखभाल किए बिना अन्न का निरीक्षण करें और उसे अपने भाई को भोजन के रूप में प्रदान करें।

भाई दूज की कहानी: भाई दूज की कहानी हिन्दू पौराणिक कथाओं में एक रोचक कथा है। एक समय की बात है, देवी यमुना अपने भाई यमराज से मिलने के लिए व्रत कर रही थीं। यमुना की आशीर्वाद से उनके भाई यमराज को बड़ी खुशी हुई और उन्होंने अपनी बहन की कामना की थी कि जिनके साथ वह मिलेंगी, उसे वह उदारता और शांति मिलेगी। इसी कारण भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।

भैया दूज का व्रत कब का है: भैया दूज का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है।

भाई दूज के व्रत में क्या खाना चाहिए: भाई दूज के व्रत में बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष रूप से पकवान बनाती हैं और उन्हें पूजा के बाद ब्रतभोजन कराती हैं।

2023 में भाई दूज पूजा का समय: 2023 में भाई दूज पूजा का समय कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया तिथि 14 नवंबर 2023 को दोपहर 2:36 बजे शुरू हो रही है, और 15 नवंबर को दोपहर 1:47 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, भाई दूज 15 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा।

भाई दूज का व्रत क्यों रखा जाता है: भाई दूज का व्रत बहन-भाई के प्रेम और समर्थन का प्रतीक है। इसके माध्यम से भाई और बहन एक दूसरे के साथ आपसी संबंध को मजबूत करते हैं और एक दूसरे की कुशलता और सुरक्षा की कामना करते हैं।

भाई दूज का दूसरा नाम: भाई दूज को यमा द्वादशी, भैया दूज, यमद्वितीया, यमद्वया, भय्या दूज और भाईया दूज भी कहा जाता है।

क्या भाई दूज एक हिंदू त्योहार है: हाँ, भाई दूज एक हिंदू त्योहार है जो भारतीय समुदाय में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

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